देवभूमि न्यूज 24.इन
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशभर में मृत उपभोक्ताओं के नाम पर चल रहे एलपीजी गैस कनेक्शनों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए मंत्रालय द्वारा सभी राज्य सरकारों से मृत व्यक्तियों का डाटा और आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, ताकि घरेलू गैस कनेक्शन की बुकिंग, वितरण और सब्सिडी प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता लाई जा सके।
केंद्र सरकार की ओर से देश की तीन प्रमुख गैस कंपनियों के माध्यम से प्रत्येक घरेलू गैस उपभोक्ता को प्रति सिलेंडर लगभग 22 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। मौजूदा समय में देशभर में करीब 50 करोड़ घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं। अनुमान है कि इनमें से बड़ी संख्या में ऐसे गैस कनेक्शन भी शामिल हैं, जो वर्षों पहले दिवंगत हो चुके लोगों के नाम पर अब भी सक्रिय हैं।
जानकारी के अनुसार, कई परिवार अपने दिवंगत माता-पिता या बुजुर्गों के नाम पर चल रहे गैस कनेक्शन को अपने नाम पर ट्रांसफर कराए बिना ही हर महीने सिलेंडर बुक कर रहे हैं और सब्सिडी का लाभ भी ले रहे हैं। इतना ही नहीं, अनेक घरों में मल्टीपल गैस कनेक्शन पाए गए हैं, जिससे सरकार को हर माह करोड़ों रुपये की सब्सिडी का नुकसान हो रहा है।
इन्हीं अनियमितताओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने यह अहम निर्णय लिया है कि मृत उपभोक्ताओं के सभी गैस कनेक्शन या तो रद्द किए जाएंगे या फिर उन्हें परिवार के किसी पात्र सदस्य के नाम पर ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा। इसके लिए राज्य सरकारों से मृत व्यक्तियों का सत्यापित डाटा और आधार से संबंधित जानकारी मांगी जा रही है।
इसके साथ ही सरकार देशभर में घरेलू गैस उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी प्रक्रिया भी तेज़ी से करवा रही है। इस प्रक्रिया के तहत उपभोक्ताओं के आधार कार्ड को बैंक खातों और गैस कनेक्शन से लिंक किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और सब्सिडी का लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंचे।
केंद्र सरकार के इस कदम को सब्सिडी प्रणाली में सुधार, कालाबाजारी पर रोक और सरकारी धन की बचत की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।