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जन्म: 9 जनवरी 1938
निधन: 27 अक्टूबर 1974
चक्रवर्ती पद्मनाभन रामानुजम (C. P. Ramanujam) भारत के 20वीं सदी के एक विलक्षण और प्रतिभाशाली गणितज्ञ थे। वे विशेष रूप से संख्या सिद्धांत (Number Theory) और बीजगणितीय ज्यामिति (Algebraic Geometry) के क्षेत्र में अपने मौलिक योगदान के लिए जाने जाते हैं। गणित के प्रति उनका समर्पण और सौंदर्यबोध उन्हें एक विशिष्ट पहचान देता है।
उनका जीवन कई मायनों में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन से मिलता-जुलता माना जाता है। दोनों ही असाधारण प्रतिभा के धनी थे, दोनों का जीवन अल्पायु में समाप्त हुआ और दोनों ने गणित को केवल गणनाओं तक सीमित न रखकर उसे सुंदर और रचनात्मक बनाने पर बल दिया।
🔹 जन्म एवं शिक्षा
सी. पी. रामानुजम का जन्म 9 जनवरी 1938 को मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में हुआ।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा लोयोला कॉलेज, मद्रास से प्राप्त की और बाद में भारत के प्रतिष्ठित संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में अध्ययन किया।
🔹 गणित में योगदान
सी. पी. रामानुजम गणितीय सोच में मौलिकता और स्पष्टता के लिए प्रसिद्ध थे। कहा जाता है कि वे एक ही गणितीय समस्या को 100 से अधिक तरीकों से प्रस्तुत कर सकते थे।
उनका मानना था कि गणित केवल कठिन समीकरणों का विषय नहीं, बल्कि एक कला है, जिसमें सुंदरता, सरलता और तार्किक स्पष्टता होनी चाहिए।
उन्होंने गणितीय विचारों को नए दृष्टिकोण से देखने और उन्हें अधिक प्रभावी एवं सौंदर्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इसी कारण वे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के बीच अत्यंत सम्मानित रहे।
🔹 अल्पायु में अवसान
27 अक्टूबर 1974 को मात्र 36 वर्ष की आयु में सी. पी. रामानुजम का निधन हो गया। उनकी असमय मृत्यु भारतीय गणित जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। हालांकि उनका जीवन छोटा रहा, लेकिन उनका योगदान गणित के क्षेत्र में सदैव अमर रहेगा।
🌟 सी. पी. रामानुजम एक ऐसे गणितज्ञ थे जिन्होंने गणित को कठिन से सुंदर और जटिल से सरल बनाने की प्रेरणा दी।
उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।