सिरमौर जिला के गिरिपार हॉटी समुदाय का सबसे महंगा माघी भातियोज़ आज

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देवभूमि न्यूज 24.इन
शिलाई क्षेत्र में गिरिपार हॉटी समुदाय का पारंपरिक माघी (भातियोज़) पर्व 28 गते पोश से विधिवत आरंभ हो गया है। पर्व की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं
10 जनवरी 2026 को बोश्तो, 11 जनवरी को भातियोज़, 12 जनवरी को साजो तथा भातियोज़ के बाद मनाया जाने वाला खोड़ा पर्व 21 जनवरी (बुधवार) को मनाया जाएगा।
सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार बोश्तो के दिन सभी घरों में पारंपरिक पहाड़ी पकवान तैयार किए जाते हैं, जिन्हें देसी घी के साथ परोसा जाता है। अगले दिन भातियोज़ के अवसर पर प्रातः काली माता के नाम से गुड़ का खिंडा बनाया जाता है, इसके बाद पूरे विधि-विधान से भातियोज़ पर्व मनाया जाता है।
भातियोज़ के दिन राजपूत और ब्राह्मण समुदाय के घरों में बकरा अथवा खाडू काटने की परंपरा है, जबकि दलित समुदाय के परिवारों में बकरी, भेड़ अथवा सूअर काटे जाते हैं। साजो के दिन सभी लोग ब्राह्मणों को आटा और गुड़ दान करते हैं। मकर संक्रांति के दिन किसी भी परिवार में मांसाहार नहीं किया जाता। इसके बाद खोड़ा पर्व पर लोग अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार पुनः बकरे काटते हैं।
भातियोज़ पर्व को पहाड़ों का सबसे महंगा त्यौहार माना जाता है। इस अवसर पर बाहर नौकरी कर रहे लोग भी अपने गांव-घर लौटते हैं। यह दिन विशेषकर गरीब परिवारों के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है। कई परिवार बकरा या खाडू खरीदने के लिए महिलाओं के गहने तक गिरवी रख देते हैं, तो कुछ लोग जमीन बेचने तक को मजबूर हो जाते हैं। कई परिवार सेठ-साहूकारों से दस प्रतिशत मासिक ब्याज पर धन उधार लेकर यह त्यौहार मनाते हैं।
पिछले कई वर्षों से इस महंगे त्यौहार को बंद करवाने के प्रयास भी हुए, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, परंपरा का प्रभाव और गहरा होता चला गया। स्थिति यह है कि गिरिपार क्षेत्र में इस एक माह का खर्चा कई परिवारों के लिए वर्ष के बाकी ग्यारह महीनों के खर्च से भी अधिक हो जाता है।