शिलाई क्षेत्र की सड़कें आज भी राम भरोसे,वाहनों की सुरक्षा को लेकर न पैरापिट,न क्रेश बैरियर

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   *देवभूमि न्यूज 24.इन*
  *कार्तिकेय तोमर,शिलाई*

सिरमौर जिला के हरिपुरधार क्षेत्र में क्रैश बैरियर के अभाव में हुए दर्दनाक बस हादसे के दूसरे दिन माघी पर्व के दौरान शिलाई क्षेत्र में एक अस्थायी राहत जरूर देखने को मिली। निजी बसों में ओवरलोडिंग नहीं दिखी और न ही छोटे वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां नजर आईं।
लेकिन यह राहत कितनी स्थायी है, इस पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। शिलाई क्षेत्र पहले भी ओवरलोडिंग और सड़क सुरक्षा के अभाव के कारण दो भीषण बस हादसों का दंश झेल चुका है। पहला हादसा शिलाई के समीप बांदली में हुआ था, जिसमें 35 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। दूसरा हादसा शिलाई–बाली कोटी मार्ग पर शिलाई अस्पताल के पास हुआ, जहां ओवरलोड बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से 20 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
इन दोनों हादसों का कारण एक ही था सड़कों पर पैरापिट और क्रैश बैरियर जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं का न होना। फर्क सिर्फ इतना आया है कि उस समय का स्टेट हाईवे आज राष्ट्रीय राजमार्ग बन चुका है, जहां अब सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर लगाए जा चुके हैं। मगर शिलाई–बाली कोटी सड़क की हालत आज भी वैसी ही बनी हुई है, जैसी हादसों से पहले थी।
शिलाई लोक निर्माण विभाग मंडल के अंतर्गत आने वाली अधिकांश सड़कों पर वाहन सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। इसी मंडल का टिंबी–मिल्लाह–बकरास बस मार्ग क्षेत्र में “खूनी सड़क” के नाम से जाना जाता है, जहां सबसे अधिक दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त शिलाई–पंदयाट, शिलाई–बेला, शिलाई–नाया और बांदली–शरोग मार्ग वी अन्य मार्ग भी सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं, जहां न पैरापिट हैं और न ही क्रैश बैरियर।
हर बड़े हादसे के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर संवेदनाएं जताते हैं और बड़े-बड़े आश्वासन देते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह मुद्दा फाइलों और बयानों में सिमट कर रह जाता है। इस लापरवाही के लिए सरकार, लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधि—तीनों समान रूप से जिम्मेदार हैं।
आशंका जताई जा रही है कि हरिपुरधार बस हादसा भी कुछ दिनों में भुला दिया जाएगा और फिर से छोटे-बड़े वाहनों में ओवरलोडिंग का वही खतरनाक सिलसिला शुरू हो जाएगा। ऐसे में शिलाई पुलिस प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। खासकर टैक्सी के रूप में चल रहे ओवरलोड निजी वाहनों पर सख्त और निरंतर कार्रवाई समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
जब तक सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक शिलाई क्षेत्र की सड़कें यूं ही “राम भरोसे” बनी रहेंगी और हर मोड़ पर एक और हादसे की आशंका मंडराती रहेगी।