व्यवस्था परिवर्तन’ का असर: एचपीएसईबीएल ने एक वर्ष में अर्जित किए 300 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री सुक्खू

Share this post


देवभूमि न्यूज 24.इन
राज्य ब्यूरो,शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) ने 31 दिसंबर 2025 तक 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जबकि 31 दिसंबर 2024 तक इसी अवधि में यह आंकड़ा 206 करोड़ रुपये था। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की ‘व्यवस्था परिवर्तन’ नीति का प्रत्यक्ष परिणाम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितैषी बनाना है, जिसके तहत बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं।
सुधारों से मजबूत हुई बिजली बोर्ड की आर्थिक स्थिति
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन, तथ्य आधारित निर्णयों और संरचनात्मक सुधारों से बिजली क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान हुआ है, जिससे एचपीएसईबीएल की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।
प्रदेश में हिमाचल प्रदेश विद्युत ग्रिड कोड लागू किया गया है, जिससे बिजली संचालन राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हुआ है। इससे ग्रिड की सुरक्षा बढ़ी है और प्रदेश में बिजली आपूर्ति अधिक सुचारू एवं निर्बाध बनी है।
स्मार्ट मीटर और डिजिटल सुधार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शिमला और धर्मशाला में 1.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इनसे उपभोक्ता मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी दैनिक बिजली खपत की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इसके अतिरिक्त काला अंब जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में एससीएडीए प्रणाली लागू की गई है, जिससे बिजली नुकसान में लगभग 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
डिजिटलाइजेशन से खर्च में 46 प्रतिशत तक की बचत
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सुधारों के चलते बिजली बोर्ड के खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आई है। पुराने और महंगे अनुबंधों को समाप्त कर पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाने से बिजली बिलिंग और आईटी सेवाओं पर होने वाला वार्षिक खर्च 46 प्रतिशत तक घटा है।
2,100 से अधिक युवाओं की भर्ती को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीएसईबीएल के फील्ड कर्मचारी बोर्ड की सबसे बड़ी ताकत हैं, जिनके प्रयासों से आपदाओं के समय भी बिजली आपूर्ति बहाल की जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बोर्ड में 2,100 से अधिक युवाओं की भर्ती को मंजूरी दी है।
इसमें 1,602 ‘बिजली उपभोक्ता मित्र’ और 500 जूनियर ‘टी-मेट्स’ शामिल हैं, जिससे मरम्मत कार्यों में तेजी आएगी और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी।
जनजातीय क्षेत्रों में बिजली और सौर ऊर्जा पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
किलाड़ घाटी में 62 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
काजा क्षेत्र में 148 परिवारों को सोलर ऑफ-ग्रिड सिस्टम उपलब्ध करवाए गए हैं।
पांगी (चंबा) क्षेत्र में बैटरी भंडारण प्रणाली (BESS) के साथ सोलर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं।
सोलर परियोजनाओं पर ब्याज सब्सिडी
प्रदेश सरकार जनजातीय और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी प्रदान कर रही है—
जनजातीय क्षेत्रों में 250 केवी से 1 मेगावाट तक के संयंत्रों पर 5 प्रतिशत
गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत
एक मेगावाट से अधिक क्षमता वाले सौर संयंत्रों पर 3 प्रतिशत ब्याज उपदान
कांगड़ा जिले में बनेंगे नए उप-स्टेशन
मुख्यमंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अधोसंरचना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। इसके तहत अगले वित्त वर्ष में कांगड़ा जिले में छह 33 केवी/11 केवी उप-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
ये उप-स्टेशन—
नूरपुर (गणोग)
देहरा (कारला कोटला)
ज्वालामुखी (मझीण और थेड़)
इंदौरा (मोकी)
नगरोटा बगवां (समलोटी)
में बनाए जाएंगे।
बेहतर सेवाओं के साथ रोजगार सृजन
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार के ये सभी प्रयास बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम हैं।