पंजाब की सियासत में हलचल, कांग्रेस 2027 का चुनाव बिना मुख्यमंत्री चेहरे के लड़ेगी

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देवभूमि न्यूज 24.इन
चंडीगढ़

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। इस बार विवाद सीधे तौर पर 2027 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ताजा बयान ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।
भूपेश बघेल ने साफ कहा है कि कांग्रेस 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे के लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चेहरा राहुल गांधी हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेगी। उनका यह बयान पंजाब कांग्रेस में चल रही महत्वाकांक्षाओं और आपसी टकराव पर एक तरह से विराम लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अघोषित रेस की चर्चाएं तेज थीं। कभी कोई नेता खुद को भविष्य के लिए तैयार बताता नजर आया, तो कभी कोई इससे दूरी बनाता दिखा। इसी बीच नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के मुख्यमंत्री पद को लेकर दिए गए ‘500 करोड़ के अटैची केस’ वाले बयान ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया था। भले ही बाद में इस बयान का खंडन किया गया, लेकिन तब तक यह कांग्रेस की अंदरूनी कलह और भरोसे के संकट का प्रतीक बन चुका था।
पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग—सभी किसी न किसी रूप में 2027 की चर्चाओं में रहे हैं। राजा वड़िंग ने स्वयं को भविष्य के लिए तैयार बताया था, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग्स और गैंगस्टरवाद के खिलाफ लड़ाई उनके लिए किसी पद से अधिक अहम है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेश बघेल का यह ऐलान पार्टी में बढ़ती अंदरूनी खींचतान पर ब्रेक लगाने और कांग्रेस को सामूहिक नेतृत्व के मॉडल पर आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला कांग्रेस को मजबूती देता है या अंदरखाने की सियासत नए रूप में सामने आती है।