देवभूमि न्यूज 24.इन
गुजरात का अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव राज्य की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन आकर्षण का एक अनोखा प्रतीक है। हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह उत्सव न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाता है। इस दौरान गुजरात का आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर उठता है और वातावरण उल्लास, उमंग व उत्सवधर्मिता से सराबोर हो जाता है।
उत्तरायण के नाम से प्रसिद्ध यह पर्व लगभग आठ दिनों तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है और देवताओं के जागरण का समय माना जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को अत्यंत शुभ पर्व माना जाता है। इस अवसर पर लोग नए संकल्प लेते हैं और खुशहाली की कामना करते हैं।
पर्यटन की दृष्टि से यह महोत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश-विदेश से हजारों पर्यटक विशेष रूप से अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में एकत्र होते हैं। खुले मैदानों, नदी तटों और ऐतिहासिक स्थलों पर आयोजित पतंगबाज़ी प्रतियोगिताएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होती हैं। विदेशी पतंगबाज़ अपने-अपने देशों की पारंपरिक पतंगों और तकनीकों का प्रदर्शन करते हैं, जिससे यह उत्सव अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का मंच बन जाता है।
नीले आकाश में उड़ती रंगीन पतंगें, छतों पर उल्लास से भरे परिवार, लोक संगीत की मधुर धुनें और पारंपरिक व्यंजन जैसे उंधियू, जलेबी और तिल-आधारित मिठाइयाँ पर्यटकों को गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं। पतंग महोत्सव के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जो पर्यटन अनुभव को और भी यादगार बना देते हैं।
इतिहास की बात करें तो गुजरात में पहला अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव वर्ष 1989 में आयोजित किया गया था। इसके बाद से यह उत्सव निरंतर विस्तार पाता गया और आज यह विश्व के प्रमुख पतंग उत्सवों में गिना जाता है। राजघरानों से लेकर आम जनजीवन तक, पतंगबाज़ी सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है।
कुल मिलाकर, गुजरात का अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति, पर्यटन और वैश्विक सौहार्द का उत्सव है। यह महोत्सव पर्यटकों को न केवल रंगीन आकाश का सौंदर्य दिखाता है, बल्कि गुजरात की आत्मा से साक्षात्कार भी कराता है—एक ऐसा अनुभव जो जीवन भर स्मृतियों में संजोकर रखा जाता है।