देवभूमि न्यूज 24.इन
बंजार (कुल्लू)
हिमाचल प्रदेश
बंजार विधानसभा क्षेत्र के लारजी क्षेत्र में आयोजित मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान में समन्वयक के तौर पर सक्रिय सहभागिता निभाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कानून कांग्रेस की दूरगामी सोच का परिणाम है, जिसने विकास के साथ-साथ गरीब और जरूरतमंद लोगों को घर-द्वार पर रोजगार उपलब्ध कराया। इस योजना के कारण देश में मजदूरों का पलायन काफी हद तक रुका था।
वक्ताओं ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत होने वाले खर्च में 90 प्रतिशत केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार का योगदान होता था, लेकिन अब इसे बदलकर 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार कर दिया गया है। इससे हिमाचल प्रदेश जैसे आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश अभी इतनी आत्मनिर्भर स्थिति में नहीं है कि वह 40 प्रतिशत का अतिरिक्त भार वहन कर सके, जिससे इस योजना के प्रभावी संचालन में गंभीर दिक्कतें आएंगी।
इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पहले मनरेगा की योजनाएं पंचायत स्तर पर बनाई जाती थीं, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य होते थे। लेकिन अब योजनाएं केंद्र स्तर से तय की जा रही हैं, जो सीधे-सीधे पंचायतों के अधिकारों और शक्तियों को कमजोर करने का प्रयास है। इसे पंचायती राज व्यवस्था पर हमला बताया गया।
इस कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री सेस राम आज़ाद, कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष श्री राम सिंह मियां, सेवा दल जिला अध्यक्ष महेश शर्मा, टी.सी. महंत, दलीप विष्ट, थरवन पालसरा, युवा कांग्रेस अध्यक्ष योग राज, मोती राम पालसरा, घनश्याम गौतम, किशन जी सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में मनरेगा को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने और आम जनता के हितों की रक्षा करने का संकल्प लिया।