पंचायत प्रधान की 1 फरवरी से मोहर-हस्ताक्षर होंगे अमान्य

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देवभूमि न्यूज 24.इन
शिमला

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश की 3577 ग्राम पंचायतों में चुनी गई पंचायत सरकार का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही पंचायत प्रधान और उपप्रधान की वैधानिक शक्तियां भी खत्म हो जाएंगी।
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 140(3) के तहत 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा होते ही 1 फरवरी से पंचायत प्रधान की मोहर और हस्ताक्षर किसी भी सरकारी दस्तावेज पर मान्य नहीं होंगे। ऐसे में ग्रामीण जनता को अपने लंबित या नए कार्यों के लिए पंचायत प्रधान के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना होगा।
प्रधानों की शक्तियां समाप्त होने के बाद पंचायतों का संचालन किसके हाथों में होगा, इस पर स्थिति स्पष्ट की जा रही है। नियमों के अनुसार पंचायत का कार्यभार या तो तीन सदस्यीय अस्थायी कमेटी को सौंपा जा सकता है अथवा पंचायत सचिव को प्रशासनिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इस संबंध में पंचायतीराज विभाग द्वारा प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय सरकार के आदेश के बाद ही लिया जाएगा।
यह स्थिति प्रदेश के इतिहास में पहली बार बन रही है, जब एक साथ पूरे हिमाचल की सभी पंचायतों की कमान निर्वाचित प्रतिनिधियों से हटकर अधिकारियों या कमेटियों के पास जाएगी। इससे पहले कोविड काल में लाहौल-स्पीति और पांगी क्षेत्र में चुनाव टलने की स्थिति में तीन सदस्यीय कमेटियों के माध्यम से पंचायत कार्य संचालित किए गए थे।
प्रशासन ने ग्रामीण जनता से अपील की है कि 1 फरवरी के बाद पंचायत प्रधान की मोहर या हस्ताक्षर पर किसी भी दस्तावेज को मान्य न समझें और संबंधित कार्यों के लिए अधिकृत सरकारी व्यवस्था से संपर्क करें।