देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखा है। ये मामला सोशल मीडिया पर अपनी बात रखे जाने से जुड़ा था, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट की गाइडलाइंस को ही बरकरार रखा। इसमें स्पष्ट किया गया कि सोशल मीडिया पोस्ट पर सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में पुलिस को सोशल मीडिया पर कड़ी, आपत्तिजनक, आलोचनात्मक राजनीतिक भाषण पर बिना जांच किए और शिकायतकर्ता के कंप्लेन की वैधता को जांचे बिना केस दर्ज करने से रोका गया है।
सुप्रीम कोर्ट का सोशल मीडिया पोस्ट पर अहम आदेश
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर SC का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उन लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है जो सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार या सत्ताधारी पार्टी की आलोचना करते हैं। सर्वोच्च कोर्ट का फैसला उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। इस आदेश से सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों को परेशान करने की मौजूदा प्रथा खत्म हो सकती है।
गाइडलाइंस में कहा गया है कि पुलिस को केस दर्ज करने से पहले यह वेरिफाई करना होगा कि शिकायतकर्ता कानून के अनुसार पीड़ित व्यक्ति की श्रेणी में आता है या नहीं। इसके साथ ही FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करनी होगी। पुलिस आपराधिक कानून तभी लागू कर सकती है जब भाषण हिंसा भड़काने या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो।
राजनीतिक आलोचना, व्यंग्य मानहानि नहीं है- HC
इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने राज्य की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री की आलोचना करने के लिए दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करते हुए यह आदेश पारित किया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि सोशल मीडिया पोस्ट साफ तौर पर राजनीतिक आलोचना और व्यंग्य थे। ये किसी की मानहानि या फिर सार्वजनिक उपद्रव की वजह नहीं हैं। आर्टिकल 19(1)(a) की ओर से ये पूरी तरह सुरक्षित हैं।
क्यों नहीं हो सकता एक्शन
ऐसे में अदालत ने कहा कि दुश्मनी को बढ़ावा देने, जानबूझकर अपमान, सार्वजनिक उपद्रव, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा या राजद्रोह का कोई भी मामला तब तक दर्ज नहीं किया जाएगा जब तक कि हिंसा, नफरत, या सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़काने वाले प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद न हों। हाईकोर्ट के आदेश की जांच करने और नियमों को देखने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उच्च न्यायालय ने जो किया है, उसकी सराहना करते हैं।
जानें गाइडलाइंस में क्या कहा गया
सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को नियमों की जांच करने की जरूरत पर जोर देने की कोशिश की क्योंकि इसके व्यापक प्रभाव होंगे, कोर्ट ने कहा कि उनमें कोई कमी नहीं है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि ऑटोमैटिक या मैकेनिकल गिरफ्तारियां अस्वीकार्य हैं, और आपराधिक प्रक्रिया के इस्तेमाल में आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए।