किस देवता को प्रिय है कौन सा फूल? पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं गलत रंग के पुष्प, जानें सही नियम

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*देवभूमि न्यूज 24.इन*

⭕हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान फूलों का अर्पण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी कोमल भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है। फूल दिव्यता और पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हर देवता की अपनी एक विशेष पसंद होती है? शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, गलत फूल चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं कि आपकी पूजा की थाली में किस भगवान के लिए कौन सा फूल होना चाहिए।

⚜️भगवान शिव और माता पार्वती
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महादेव को सादगी प्रिय है। धार्मिक ग्रंथों के जानकारों के मुताबिक, भगवान शिव को धतूरे के फूल, हरसिंगार, नागकेसर और सफेद रंग के फूल अत्यंत प्रिय हैं। लेकिन, ध्यान रहे, शिव जी की पूजा में कभी भी •’केतकी’ का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। वहीं, माता पार्वती को लाल गुलाब या गुड़हल के फूल पसंद हैं।

⚜️भगवान श्री गणेश और विष्णु जी
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गणपति बप्पा को लाल और पीले रंग के फूल भाते हैं। विद्वानों का कहना है कि गणेश जी को गुड़हल और गेंदे के फूल के साथ ‘दूर्वा’ चढ़ाना जरूरी है। हालांकि, उन्हें भूलकर भी •’तुलसी’ अर्पित नहीं करनी चाहिए। भगवान विष्णु की बात करें, तो उन्हें पीले रंग के फूल जैसे कमल, गेंदा और जूही पसंद हैं। तुलसी दल चढ़ाने से वे तुरंत प्रसन्न होते हैं।

⚜️माता लक्ष्मी और सरस्वती
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धन की देवी लक्ष्मी को कमल का फूल सबसे अधिक प्रिय है। इसके अलावा, उन्हें लाल गुलाब भी चढ़ाया जा सकता है। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर, विद्या की देवी सरस्वती को सफेद या पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए, क्योंकि ये रंग शांति और ज्ञान के प्रतीक हैं।

⚜️फूल चढ़ाने के कुछ जरूरी नियम
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धार्मिक पंचांग और रीति-रिवाजों के अनुसार, पूजा के लिए फूल हमेशा सुबह के समय ही तोड़ने चाहिए। कभी भी जमीन पर गिरे हुए या बासी (मुरझाए हुए) फूलों को भगवान पर नहीं चढ़ाना चाहिए। साथ ही, फूलों को किसी गंदे पात्र या प्लास्टिक की थैली में रखने के बजाय टोकरी या शुद्ध बर्तन में रखना चाहिए।

            *🚩हरिऊँ🚩*