देवभूमि न्यूज 24.इन
शिमला
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि पंचायत चुनावों को लेकर प्रदेश सरकार की असल मंशा अब पूरी तरह सामने आ गई है। यदि सरकार को समय पर पंचायत चुनाव नहीं करवाने थे और उच्च न्यायालय के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी ही थी, तो फिर चुनाव की तैयारी का स्वांग क्यों रचा गया?
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा की जा रही देरी पर सवाल उठा रही थी, तब मुख्यमंत्री और उनके मंत्री लगातार यह क्यों कहते रहे कि चुनाव समय पर होंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक तरफ माननीय न्यायालय के आदेशों पर अवांछनीय टिप्पणी की और दूसरी तरफ निर्वाचन सूची के प्रकाशन के निर्देशों से जुड़ी खबरें छपवाकर प्रदेश की जनता को गुमराह किया।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि अपनी पाताल में चली गई लोकप्रियता के चलते सरकार ने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि पंचायत चुनाव नहीं करवाने हैं। इसी कारण राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की बार-बार अवहेलना की गई। आयोग द्वारा भेजे गए पत्रों पर न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही समय पर जवाब दिया गया। उन्होंने सरकार को पूर्णतः दिशाहीन और किंकर्तव्यविमूढ़ करार दिया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे देश में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार स्वयं लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ा रही है तथा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को कुचल रही है। पंचायत चुनावों को सरकार इतनी हल्के में क्यों ले रही है, यह समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार केंद्र से सहयोग न मिलने का रोना रोती है और दूसरी तरफ केंद्र द्वारा दिए जा रहे भरपूर सहयोग को प्राप्त करने के रास्ते खुद ही बंद कर रही है। बिना निर्वाचित स्थानीय निकायों के विकास कैसे होगा और केंद्र सरकार की सैकड़ों योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे संभव होगा? अधिकांश केंद्रीय योजनाओं में निर्वाचित स्थानीय निकायों की भूमिका अनिवार्य होती है।
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार पंचायत चुनावों को छह महीने या उससे अधिक समय तक और टालती है तो प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली योजनाओं की धनराशि या तो नहीं मिलेगी या फिर उसमें भारी देरी होगी। 16वें वित्त आयोग के तहत शहरी और ग्रामीण निकायों के लिए देशभर में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के इसका लाभ कैसे मिलेगा?
उन्होंने कहा कि चुनाव न होने से स्थानीय निकायों का विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। सरकार की नाकामी के चलते प्रदेश में मनरेगा के 1.72 लाख प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को एक दिन का रोजगार तक नहीं मिला है।
जयराम ठाकुर ने याद दिलाया कि 9 जनवरी को माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार चुनाव करवाने के बजाय उन्हें टालने की रणनीति पर काम करती रही। बार-बार समय सीमा समाप्त होने के बावजूद निर्वाचन सूची का प्रकाशन नहीं किया गया और प्रदेश की जनता को गुमराह किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव पर होने वाले खर्च की दुहाई देती है, लेकिन चुनाव न करवाने के लिए मुकदमे लड़ने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। आपदा प्रबंधन कानून का सहारा लेकर चुनाव रोकने की कोशिश की जा रही है, जबकि सबसे अधिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर सरकार अपने तीन साल का जश्न मनाती है और आपदा राहत के लिए केंद्र से मिले करोड़ों रुपये खर्च करती है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री यह स्पष्ट करें कि आपदा प्रबंधन कानून लागू होने के बाद उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास की समीक्षा के लिए कितने दौरे किए हैं।