देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली
बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संसद के बाहर और संसद के अंदर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक लेकर पहुंचें। वे संसद परिसर में भी वह किताब देखा रहे थे और लोकसभा के अंदर भी लगातार स्पीकर को किताब दिखाते हुए उन्हें बोलने देने की मांग करते रहे। जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में लिखी बातों को लेकर सोमवार से ही सदन में विपक्ष विरोध कर रहा है।
राहुल गांधी और पीएम मोदी।
किताब और बैनर
लोकसभा में कांग्रेस सांसद बैनर लेकर पहुंचे थे। जिसमें लिखा था – जो उचित समझो वो करो। इसमें एक तरफ पीएम और रक्षा मंत्री की तस्वीर थी और दूसरी तरफ जनरल नरवणे की। जब विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी कर रहे थे तब राहुल गांधी अपनी सीट पर भी खड़े होकर किताब दिखा रहे थे। सत्ता पक्ष की तरफ सबसे आगे के बैंच में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अकेले बैठे थे। विपक्ष की नारेबाजी पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी पर इशारों-इशारों में पलटवार भी किया। उन्होंने कहा कि सदन में बोलने की अनुमति देना या नहीं देना नियम-पक्रिया से निर्धारित होता है।
राहुल गांधी ने मंगलवार को बिरला को पत्र लिखकर उन पर सरकार के इशारे पर खुद को सदन में बोलने से रोकने का आरोप लगाया था। बिरला ने कहा कि इस देश में अलग-अलग समय आप सरकार में रहे हैं। मेरा मत है कि इतने लंबे समय तक सरकार में रहने के बावजूद आप सदन की परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़ रहे हैं। विरोध का तरीका और हो सकता है। लेकिन आप उस जगह (सत्तापक्ष की सीटों की तरफ) जाकर मर्यादाओं को तोड़ेंगे तो लोकतंत्र के प्रति लोगों को विश्वास कम होगा।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि आप इतने वरिष्ठ नेता हैं, आपने लंबे समय तक शासन किया है। बोलने की अनुमति देना या नहीं देना नियम प्रक्रिया से निर्धारित होता है। क्या आप मर्यादा तोड़ेंगे? आपके सदस्य इधर से उधर जाएंगे, क्या यह उचित है? बिरला ने कहा कि पहले भी विरोध हुआ है, लेकिन मर्यादा किसी ने नहीं तोड़ी। आप मर्यादाएं तोड़ रहे हैं। यह उचित नहीं है।
राहुल ने कहा पीएम को किताब भेंट करेंगे
संसद परिसर में राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब दिखाते हुए उसके एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि कि जब चीन के टैंक भारत की सीमा की तरफ बढ़ रहे थे, उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं किया था।
राहुल ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री सदन में आते हैं तो मैं उन्हें ये किताब भेंट करूंगा। राहुल ने कहा कि वे (सरकार) कहते हैं कि यह किताब अस्तित्व में नहीं है, लेकिन यह रही किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है।
यह नरवणे जी की किताब है..लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसके अंश उद्धृत नहीं कर सकता। एनबीटी के ये पूछने पर कि आपको किताब कहां से मिली और क्या आम लोगों को भी ये किताब मिल सकती है, राहुल गांधी ने कहा- आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये किताब कहां से आई है