एक दिव्य रहस्य: हनुमान जी की पूँछ में किसकी शक्ति थी?

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✍️देवभूमि न्यूज 24.इन
हम सभी जानते हैं कि बजरंगबली शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं, किन्तु लंका दहन के समय उनकी पूँछ में इतनी असीमित शक्ति कहाँ से आई कि सोने की नगरी राख हो गई?
यह कथा महादेव, माता पार्वती और रावण से जुड़े एक अद्भुत रहस्य को उजागर करती है।
👇 पढ़ें यह दिव्य प्रसंग 👇
🕉️ कैलाश पर माता पार्वती की असहजता
एक दिन माता पार्वती ने महादेव से निवदेन किया, “प्रभो! रावण जब भी कैलाश आता है, मेरे मन में असहजता भर जाती है। मुझे भय है कि कहीं क्रोधवश मैं उसे शाप न दे दूँ या भस्म न कर दूँ। कृपया उसे यहाँ आने से रोकें।”
महादेव जानते थे कि रावण के आचरण से देवी रुष्ट हैं। जब रावण दर्शन के लिए आया, तो शिवजी ने उसे समझाया:
“रावण! तुम्हारा यहाँ आना पार्वती को प्रिय नहीं है। यदि उन्होंने तुम्हें शाप दे दिया, तो मैं भी विवश हो जाऊँगा। इसलिए अब तुम कैलाश मत आना। मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि जब भी तुम मुझे स्मरण करोगे, मैं स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊँगा।”
🔥 लंका दहन और रावण का विस्मय
समय का चक्र घूमा। हनुमान जी ने अकेले ही पूरी स्वर्णिम लंका को जलाकर राख कर दिया। रावण का अहंकार धूल में मिल गया।
हताश रावण सोचने लगा— “एक साधारण वानर में इतनी अपरिमित शक्ति आई कहाँ से?”
व्याकुल होकर उसने महादेव का आह्वान किया। शिवजी प्रकट हुए। रावण ने पूछा, “प्रभो! एक अकेले वानर ने मेरी लंका और मेरे दर्प, दोनों को जला दिया। यह हनुमान वास्तव में कौन है? और उसकी पूँछ में ऐसी विध्वंसक शक्ति कैसे समाई?”
🔱 महादेव द्वारा अद्भुत रहस्योद्घाटन
महादेव ने मंद मुस्कान के साथ जो रहस्य खोला, वह अद्भुत था:
“रावण, वह हनुमान मेरा ही रुद्र अवतार है।”
“जब श्री विष्णु ने राम रूप में और माता लक्ष्मी ने सीता रूप में अवतार लेने का निश्चय किया, तो मेरी भी इच्छा उस दिव्य लीला में सम्मिलित होने की हुई। जब मैंने यह बात पार्वती से कही, तो वे भी मेरे साथ चलने की हठ पकड़ बैठीं।”
शिवजी ने बताया, “तब देवताओं ने यह उपाय सुझाया— मैं वानर रूप (हनुमान) धारण करूँ, और शक्ति स्वरूपा पार्वती मेरी पूँछ के रूप में साथ रहें।”
✨ “हे रावण! उसी योजना के अंतर्गत मैंने हनुमान रूप लिया और शक्ति रूपा पार्वती ने पूँछ बनकर तुम्हारी लंका का दहन किया है।”
🕉️ रावण का अंतिम कल्याण
अंत में महादेव ने रावण को मोक्ष का मार्ग दिखाया:
“रावण! तुम्हारे उद्धार का समय आ गया है। मेरा परामर्श है कि तुम युद्ध में सबसे अंत में जाना, ताकि तुम्हारे कुल के सभी राक्षस श्रीराम के हाथों मोक्ष प्राप्त कर सकें।”
रावण ने महादेव की आज्ञा शिरोधार्य की और अंततः प्रभु श्रीराम के हाथों मोक्ष को प्राप्त हुआ।
यह प्रभु की दिव्य लीला है, जहाँ शिव और शक्ति दोनों ने मिलकर राम कार्य को सिद्ध किया।

जय सियाराम! 🕉️ नमः शिवाय! जय बजरंग बली! 🙏✨

✍️ज्यो:शैलेन्द्र सिंगला पलवल हरियाणा mo no/WhatsApp no9992776726
नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान