ऑनलाइन गेमिंग की लत: युवाओं के भविष्य पर गंभीर संकट

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देवभूमि न्यूज 24.इन
डिजिटल युग में तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसी तकनीक का दुरुपयोग अब समाज के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है। ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत आज युवाओं के मानसिक, सामाजिक और आर्थिक भविष्य के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रही है। यह समस्या अब केवल व्यक्तिगत नहीं रही, बल्कि एक सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियाँ सुनियोजित रणनीति के तहत युवाओं को अपने जाल में फंसाती हैं। शुरुआत मुफ्त खेल और मनोरंजन से होती है, लेकिन जल्द ही जीत, इनाम और बोनस के नाम पर पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। धीरे-धीरे खेल आदत बन जाता है और आदत कब लत में बदल जाती है, इसका आभास तक नहीं हो पाता।
कई मामलों में देखा गया है कि युवा ऑनलाइन गेम के चक्कर में अपनी जमा पूंजी तक गंवा चुके हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक दबाव, चिड़चिड़ापन और सामाजिक दूरी जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ रही हैं। यह स्थिति न केवल युवाओं के करियर को प्रभावित कर रही है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में भी तनाव पैदा कर रही है।
सरकारें इस समस्या से अनभिज्ञ नहीं हैं। नियम-कानून और जागरूकता अभियानों के बावजूद, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म नए-नए तरीकों से युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी निगरानी और सख्त नियमन की कमी इस समस्या को और गहरा बना रही है।
इस चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ उनसे खुला संवाद भी स्थापित करना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल अनुशासन और ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाने चाहिए।
आवश्यक है कि सरकार ऐसे ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और उनके प्रचार-प्रसार में शामिल माध्यमों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। मनोरंजन और लत के बीच की रेखा को स्पष्ट करना समय की मांग है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऑनलाइन गेमिंग की यह लत आने वाली पीढ़ी के सपनों और समाज की नींव दोनों को कमजोर कर सकती है। यह केवल चेतावनी नहीं, बल्कि भविष्य को बचाने का आह्वान है।
संपादक
जगत सिंह तोमर
देवभूमि न्यूज 24.इन