भुंतर में समर्पण दिवस कार्यक्रम: जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर बोला तीखा हमला

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देवभूमि न्यूज 24.इन
कुल्लू

भुंतर में श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित समर्पण दिवस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जयराम ठाकुर ने उनके अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन आज भी नीति-निर्माण के केंद्र में होना चाहिए। हालांकि, इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद की एक गरिमा होती है, जिसे सुक्खू जी तार-तार कर रहे हैं। “जेब में बैक डेट की चिट्ठियां लेकर घूमना और ओछी राजनीति करना उन्हें शोभा नहीं देता,” उन्होंने कहा।
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को 13वें वित्त आयोग की तुलना में कहीं अधिक अनुदान मिला।
जयराम ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2010-14 के दौरान मनमोहन सिंह सरकार के समय हिमाचल को लगभग 7,800 करोड़ रुपये की आरडीजी मिली थी, जबकि 2015 से 2020 के बीच मोदी सरकार के दौरान यह राशि बढ़कर 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य में कांग्रेस की वीरभद्र सिंह सरकार भी रही, फिर भी बिना किसी भेदभाव के यह राशि प्रदान की गई।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 14वें और 16वें वित्त आयोग ने पहले ही संकेत दे दिया था कि आरडीजी को धीरे-धीरे कम (टेपर डाउन) किया जाएगा और राज्यों को अपने संसाधन बढ़ाने होंगे। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने उचित मंचों पर राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा और अब जब केवल हिमाचल ही नहीं बल्कि 17 अन्य राज्यों की भी आरडीजी बंद हुई है, तो इसे केंद्र की साजिश बताकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
गारंटियों और आर्थिक प्रबंधन पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव जीतने के लिए जल्दबाजी में दस गारंटियां तो दे दीं, लेकिन अब उनके आर्थिक बोझ को केंद्र पर डालने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषा को “विचलित करने वाली” बताते हुए कहा कि सरकार अपने कुप्रबंधन का ठीकरा केंद्र पर फोड़कर जनता पर टैक्स का बोझ डालने और सुविधाएं छीनने की तैयारी में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर आर्थिक संकट का हवाला दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर “मित्रों को कैबिनेट रैंक और महंगी गाड़ियां” दी जा रही हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री पूरी तरह से असंतुलित होकर बयानबाजी कर रहे हैं।
अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
जयराम ठाकुर ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने मिले संसाधनों का उपयोग विकास कार्यों में किया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में रिकॉर्ड सड़कों का निर्माण हुआ और हिम केयर, सहारा, शगुन जैसी जनहितैषी योजनाएं लागू की गईं। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार ने इन योजनाओं का बजट रोककर उन्हें बंद कर दिया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सरकार को “छात्र संगठन की तरह” चला रहे हैं और वित्तीय प्रबंधन की स्थिति ऐसी हो सकती है कि कर्मचारियों के भविष्य निधि तक को फ्रीज करने की नौबत आ जाए।
विपक्ष की भूमिका निभाने का संकल्प
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि वे सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ जनता की आवाज बनकर खड़े रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि आरोप-प्रत्यारोप से बाहर निकलकर प्रदेश के वास्तविक हितों पर ध्यान दें। “केवल शोर मचाने से नालायकी नहीं छिपेगी,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, स्थानीय विधायक और कई वरिष्ठ भाजपा नेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर जयराम ठाकुर ने संकल्प दोहराया कि वे प्रदेश को गलत दिशा में ले जाने वाली नीतियों के विरुद्ध डटकर संघर्ष करते रहेंगे।