सोंठ को मिला पीपीवीएफआरए पंजीकरण, जीआई टैग की राह हुई आसान

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देवभूमि न्यूज 24.इन
ब्यूरो,शिलाई
जिला सिरमौर

जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की पारंपरिक एवं औषधीय गुणों से भरपूर हाटी सोंठ को भारत सरकार की पीपीवीएफआरए (Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Authority) से पंजीकरण प्राप्त हो गया है। इसके साथ ही हाटी सोंठ को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इसे क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इस पंजीकरण से हाटी सोंठ को राष्ट्रीय पहचान मिली है और भविष्य में किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर और उचित मूल्य मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता
एशिया भर में प्रसिद्ध जिला सिरमौर का अदरक कुछ वर्षों तक बीमारी की चपेट में रहने के बाद अब पुनः बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर है। हाटी किसान संघ द्वारा इस विशिष्ट सोंठ के पंजीकरण के लिए कई वर्षों तक निरंतर प्रयास किए गए। सोंठ के नमूने दिल्ली और केरल की विभिन्न प्रयोगशालाओं में परीक्षण हेतु भेजे गए।
केंद्र सरकार के भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कालीकट (केरल) से हाटी सोंठ के औषधीय गुणों को मंजूरी मिलने के बाद इसे वर्ष 2025 के गजट में प्रकाशित किया गया। वर्तमान में जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर, कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर (धौलाकुआं) तथा हाटी किसान संघ के अध्यक्ष कुंदन सिंह शास्त्री की अहम भूमिका रही है।
गिरिपार की पहचान बनी सोंठ
गिरिपार क्षेत्र के शिलाई उपमंडल के बेला, बशवा, मोराड, मशवाड़, शरली, कांडो, चयोग, माशू और किलोड क्षेत्रों में उगाए गए अदरक से बड़ी मात्रा में हाटी सोंठ तैयार की जाती है। जिला सिरमौर की सोंठ अपनी विशिष्ट खुशबू और औषधीय गुणों के कारण देशभर में अलग पहचान रखती है।
दिल्ली की प्रसिद्ध खारी बावली मंडी में बेला सोंठ की विशेष मांग रहती है, जहां से इसे अरब देशों तक निर्यात किया जाता है। टौंस नदी के किनारे उगने वाला फाइबर जिंजर सोंठ उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
औषधीय गुणों से भरपूर
हाटी सोंठ पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के साथ गैस, अपच, कब्ज और पेट दर्द में राहत देने में सहायक मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व जोड़ों के दर्द, गठिया, सिरदर्द और मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में लाभकारी हैं।
सर्दियों में यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार से बचाव तथा बलगम कम करने में सहायक मानी जाती है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में भी उपयोगी है।
उत्पादन और किसानों को लाभ
जिला सिरमौर में लगभग 1700 हेक्टेयर भूमि पर अदरक की खेती की जा रही है, जिससे करीब 30 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अदरक के दामों में बढ़ोतरी के चलते किसान एक बार फिर इस नकदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
26 फरवरी को हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, सिरमौर (धौलाकुआं) में आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक के दौरान हाटी किसान संघ को हाटी सोंठ का पंजीकरण प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। यह प्रमाण पत्र हाल ही में केंद्र सरकार के मंत्रालय से कृषि विज्ञान केंद्र को प्राप्त हुआ है।
कम्युनिटी बेस पर किए गए इस पंजीकरण के तहत केंद्र सरकार किसानों को बेहतर कृषि उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करती है। हाटी सोंठ को मिला यह पंजीकरण गिरिपार क्षेत्र के किसानों के लिए आर्थिक मजबूती और वैश्विक पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।