देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक आयोजनों में इसके आदर्श, प्रस्तुति क्रम और सम्मान के नियम स्पष्ट किए गए हैं।
नए निर्देश क्या हैं?
- ‘वंदे मातरम्’ अब हर सरकारी आयोजन में बजाया जाएगा
अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ बजाना अनिवार्य होगा।
इसके दौरान मौजूद सभी लोगों को सम्मान स्वरूप खड़े होना आवश्यक होगा। 2. प्रस्तुति क्रम तय किया गया
यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों बजाए जाएं तो
पहले ‘वंदे मातरम्’ होगा, उसके बाद ‘जन गण मन’।3. पूरा गीत बजाया जाएगा पिछले समय में आमतौर पर केवल पहले 2 छंद गाए जाते थे।
अब पूरा 6-छंद वाला ‘वंदे मातरम्’, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, बजाया जाएगा।
किन कार्यक्रमों में अनिवार्य होगा?
तिरंगा फहराने के समय
राष्ट्रपति / राज्यपाल के आगमन या संबोधन के दौरान
पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में
सरकारी स्कूलों और आधिकारिक कार्यक्रमों में
सिनेमा हॉल पर नियम लागू नहीं होंगे
सिनेमा घरों में ‘वंदे मातरम्’ बजाने या खड़े होने की कोई अनिवार्यता नहीं होगी।
यानी फिल्मों से पहले इसका बजना या खड़े होना जरूरी नहीं रहा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी और यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के समय देशभक्ति का प्रतीक बन गया। समय-समय पर इसके स्वरूप और उपयोग को लेकर बहस होती रही है, लेकिन नए निर्देशों के ज़रिए सरकार ने इसे औपचारिक कार्यक्रमों में अधिक संरचित और समान रूप से पेश करने का निर्णय लिया है।
बदलाव के पीछे का उद्देश्य
राष्ट्रीय गीत के मान-सम्मान को बढ़ाना
कार्यक्रमों में एकरूपता और स्पष्ट मानक स्थापित करना
सभी सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति के नियम तय करना
सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाएगा और सभी सरकारी तथा शैक्षिक आयोजनों में एक समान तरीका सुनिश्चित करेगा।