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कोलकाता
१७ फरवरी २०२६ को लगने वाला वलयाकार सूर्य ग्रहण, कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा, लेकिन ज्योतिषीय प्रभाव सभी राशियों पर ३ -६ महीने तक रह सकता है। सूर्य + राहु की युति (कुंभ में), साथ ही पंचग्रही योग (सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, राहु) बन रहा है, जो परिवर्तन, नई शुरुआत, पुरानी आदतों का अंत और कर्मिक रीसेट लाता है।
यह प्रभाव मून साइन (चंद्र राशि) या लग्न पर आधारित है।
मेष राशि
ग्रहण ११ वें भाव में प्रभाव डालता है। शुभ: आय में वृद्धि, नई कमाई के स्रोत, करियर में तरक्की, बड़े फैसले सफल, धन लाभ। कई स्रोतों में इसे “गोल्डन चांस” या “चमत्कार” कहा गया है – नौकरी/व्यापार में उन्नति, पुरानी इच्छाएं पूरी। सावधानी: स्वास्थ्य (आंख/सिर) पर नजर रखें।
वृषभ राशि
१० वें भाव में प्रभाव। मध्यम से नकारात्मक: काम का बोझ बढ़ेगा, ऑफिस में तनाव/बहस, वित्तीय उतार-चढ़ाव, नई नौकरी के प्रयास में देरी। सावधानी: खर्च पर नियंत्रण, बॉस/साथियों से सतर्क रहें। स्वास्थ्य: पेट/गला संबंधी समस्या।
मिथुन राशि
९ वें भाव में। शुभ: अटके काम पूरे होंगे, भाग्योदय, यात्रा/उच्च शिक्षा में लाभ, धार्मिक कार्यों से शांति। सकारात्मक: नए अवसर, मानसिक स्पष्टता।
कर्क राशि
८ वें भाव में। सावधानी: अचानक बदलाव, स्वास्थ्य समस्या (खासकर हृदय/आंख), वित्तीय जोखिम, रिश्तों में तनाव। पुरानी समस्याएं उभर सकती हैं। उपाय जरूरी।
सिंह राशि
७ वें भाव में। मिश्रित/सावधानी: पार्टनरशिप/विवाह में चुनौतियां, व्यापार में साझेदारी सतर्कता, स्वास्थ्य (पिता/आंख) प्रभावित। कुछ में अलगाव का डर, लेकिन ग्रहण के बाद सुधार।
कन्या राशि
६ वें भाव में। शुभ: नौकरी में प्रमोशन, शत्रु नाश, स्वास्थ्य सुधार, मेहनत का फल। रोजमर्रा के काम आसान।
तुला राशि
५ वें भाव में। मध्यम: संतान/क्रिएटिविटी में उतार-चढ़ाव, रोमांस में बदलाव, शिक्षा में फोकस। सकारात्मक: नए प्रोजेक्ट्स।
वृश्चिक राशि
४ वें भाव में। सावधानी: घरेलू तनाव, माता/प्रॉपर्टी संबंधी मुद्दे, मानसिक अशांति। वित्तीय स्थिरता प्रभावित।
धनु राशि
३ वें भाव में। शुभ: संचार/भाई-बहनों से लाभ, छोटी यात्राएं सफल, साहस बढ़ेगा। कुछ स्रोतों में इसे लकी राशि माना गया – नई शुरुआत।
मकर राशि
२ वें भाव में। मध्यम: धन/परिवार में बदलाव, बोलचाल सतर्क, लेकिन स्थिरता आएगी।
कुंभ राशि (स्वराशि प्रभाव सबसे ज्यादा)
ग्रहण लग्न/चंद्र में। मिश्रित लेकिन तीव्र: आत्ममंथन, पुरानी आदतों का अंत, नई सोच/इनोवेशन से सफलता। स्वास्थ्य (आंख, सिर, हृदय) सतर्कता। कुछ में चुनौतियां, लेकिन लंबे समय में परिवर्तन शुभ।
मीन राशि
१२ वें भाव में। सावधानी: खर्च बढ़ेगा, एकांत/आध्यात्मिक समय, स्वास्थ्य (नींद/पैर) प्रभावित। विदेश/गुप्त मुद्दे उभर सकते हैं।
सामान्य प्रभाव और उपाय
सकारात्मक पक्ष: पुरानी बाधाओं का अंत, नई दिशा, तकनीक/समाजिक बदलाव (कुंभ प्रभाव)।
नकारात्मक पक्ष: भावनात्मक उथल-पुथल, निर्णय में भ्रम, स्वास्थ्य (आंख, हृदय, पिता)।
उपाय:
“ॐ नमः शिवाय” या “ॐ सूर्याय नमः” 108 बार जपें।
ग्रहण काल (दोपहर ३ :२६ से शाम ७ :५७ बजे तक ) में घर में रहें, पूजा/ध्यान करें।
सूर्य को अर्घ्य दें (ग्रहण बाद), काले तिल/कंबल दान।
राहु मंत्र: “ॐ रां राहवे नमः”।
महाशिवरात्रि की ऊर्जा से लाभ लें – शिव भक्ति जारी रखें।