देवभूमि न्यूज 24.इन
राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर प्रदेश सरकार द्वारा नियम 102 के तहत लाए गए संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि तीन वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये की आरडीजी मिलने के बावजूद सरकार आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) देगी और बिजली बोर्ड का निजीकरण नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे और मजबूत बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमकेयर के साथ-साथ सहारा योजना भी जारी रहेगी। वह राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करवाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान द्वारा लाए गए संकल्प प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता स्वयं तय करे कि बेहतर वित्त प्रबंधन किसने किया—70 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वालों ने या 17 हजार करोड़ में प्रदेश चलाने वालों ने।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार में 10 रुपये की वस्तु 50-100 रुपये में खरीदी गई। नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीपीएस को बचाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का दावा निराधार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एडवोकेट जनरल कार्यालय और एडीजी स्तर पर कानूनी लड़ाइयां मजबूती से लड़ीं, जिसके चलते 401 करोड़ रुपये में वाइल्ड फ्लावर हॉल संपत्ति प्राप्त की गई। जेएसडब्ल्यू मामले में सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी कर 18 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित की गई, जबकि शराब ठेकों की नीलामी से भी राजस्व बढ़ाया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के समय ओएसडी की नियुक्तियां की गईं और दो नेताओं को प्रिंसिपल सेक्रेटरी का स्केल दिया गया था। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत 1150 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। तीन वर्ष के कार्यकाल का कार्यक्रम मंडी में आयोजित किया गया, जहां जश्न के बजाय आपदा में जान गंवाने वालों के परिजनों को मुआवजा और घर निर्माण के लिए आठ-आठ लाख रुपये की सहायता दी गई।
“सिर के बाल उड़ रहे हैं”
नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि उनके बाल उड़ रहे हैं तो इसमें उनका क्या दोष। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष सत्ता में था, तब प्रदेश की चिंता नहीं की गई, जबकि वर्तमान सरकार गंभीरता से सोच-विचार कर आगे बढ़ रही है।
सदन में ‘दिव्य हिमाचल’ सर्वे की गूंज
विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन आरडीजी के मुद्दे पर ‘दिव्य हिमाचल’ द्वारा किए गए सर्वे का भी उल्लेख हुआ। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के मामले में राज्य सरकार के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने विपक्ष से जनमत का सम्मान करने की अपील की।