जय राम ठाकुर का कांग्रेस पर हमला, सरकार पर झूठ और अनर्गल बयानबाजी के आरोप

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देवभूमि न्यूज 24.इन
शिमला

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार और उसके नेताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बीच खुद को बड़ा दिखाने की होड़ लगी हुई है, जिसके चलते मंत्री और विधायक मर्यादाएं तोड़कर बड़े-बड़े बयान दे रहे हैं, झूठे आरोप लगा रहे हैं और बदजुबानी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आपसी तकरार और कुंठा मंडी में सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के जश्न के मंच पर भी दिखाई दी, जहां “अंधेरे में निपटने” जैसी बातें कही गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के कई विधायक अधिकारियों की मनमानी से त्रस्त हैं और अधिकारियों ने सरकार की “नस पकड़ ली है”, जिसका कारण सत्ता का संरक्षण है।
जय राम ठाकुर ने कहा कि “व्यवस्था परिवर्तन” का दावा करने वाली सुख की सरकार ने प्रदेश के सदन को झूठ बोलने का मंच बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री ने भी सदन में झूठ बोलकर मर्यादा तार-तार की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हिमाचल के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और उसे कांग्रेस से किसी प्रकार के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर संविधान की किताब लेकर चलने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे संविधान का हवाला तो देते हैं, लेकिन उसे पढ़ते नहीं, इसलिए ऐसे संदर्भों का उल्लेख कर रहे हैं जो कहीं मौजूद ही नहीं हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने अपने तीन वर्षों के कार्यकाल में भाजपा सरकार की योजनाओं को बंद करने, उनके बजट रोकने और लाभार्थियों के नाम काटने में ही समय लगाया है। उन्होंने कहा कि कोविड जैसी महामारी और पहाड़ी चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार ने बेहतर प्रबंधन किया। उस समय प्रदेश में केवल दो ऑक्सीजन पीएसए प्लांट और सीमित वेंटिलेटर बेड थे, फिर भी किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी गई। उन्होंने दावा किया कि लोन की सीमा होने के बावजूद ऋण नहीं लिया गया और किसी कर्मचारी का वेतन नहीं रोका गया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने लंबित पड़े पे कमीशन को लागू किया, पूर्व सरकार के लोन की किश्तें चुकाईं और 50 हजार करोड़ रुपये का ऋण विरासत में मिलने के बावजूद विकास कार्य जारी रखे।
मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सदन में तीन बार झूठ बोला गया। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को वित्त सचिव द्वारा भाजपा विधायकों को पत्र लिखा गया था, जबकि सदन में इससे इनकार किया गया।
सीपीएस मामले को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी लड़ाई पर भारी खर्च किया गया, जिसका विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एक सुनवाई के लिए दो वकीलों को 1.43 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित सड़कों की बहाली के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को 25 जुलाई को विभागीय डीपीआर के साथ पत्र भेजा गया था और सहायता का अनुरोध किया गया था। उनके अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी भी दी थी।
जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब देगी।