देवभूमि न्यूज 24.इन
बजट सत्र के दूसरे दिन रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। सदन के बाहर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए इस मुद्दे पर उसका स्पष्ट रुख पूछा।
उप मुख्यमंत्री ने भारत के संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ राज्यों को अधिकार प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि RDG केवल एक आर्थिक विषय नहीं, बल्कि हिमाचल और हिमाचलियत से जुड़ा प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि जो लोग पहले “स्टेट हुड मारो ठूड” जैसे नारे लगाते थे, वही आज RDG का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि कंसोलिडेटेड फंड से धन का बंटवारा किस प्रकार होगा और देश के नेताओं ने उसी समय इन विषयों का समाधान कर दिया था।
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन के समय यह स्पष्ट था कि पर्वतीय राज्य होने के कारण केंद्र सरकार विशेष सहायता प्रदान करेगी। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से जोड़ा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है और सवाल उठाया कि यदि राज्यों को सशक्त नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया।
उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्य को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी कंपनसेशन बंद किया गया और अब RDG को समाप्त करने की चर्चा हो रही है, जो प्रदेश के लिए गंभीर विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 17 में से 12 राज्यों में RDG पर निर्भरता लगभग 1 प्रतिशत के आसपास है, ऐसे राज्यों को इसकी विशेष आवश्यकता नहीं है। लेकिन हिमाचल के लिए यह अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि नागालैंड की निर्भरता 17 प्रतिशत, हिमाचल की 13 प्रतिशत और कर्नाटक की मात्र 1 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी कंपनसेशन और 54 हजार करोड़ रुपये RDG के माध्यम से प्राप्त हुए थे। RDG बंद होने के संदर्भ में जय राम ठाकुर के चुनाव के लिए तैयार रहने वाले बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के हितों का विषय है।
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि RDG हिमाचल की आवश्यकता है और इसे बंद करना प्रदेश के साथ अन्याय के समान होगा।