प्रेस वार्ता में जयराम ठाकुर का हमला: “आर्थिक संकट का राजनीतिकरण बंद करे सरकार”

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देवभूमि न्यूज 24.इन
शिमला

जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से राज्य को केंद्र से भरपूर सहयोग मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) का उल्लेख हुआ या नहीं, बल्कि यह है कि जब यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिल रही थी, तब भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का हवाला दे रही थी। उन्होंने कहा कि यदि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद यह ग्रांट बंद हुई है, तो वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावी वित्तीय प्रबंधन के जरिए प्रदेश को आगे बढ़ाए। अपनी नाकामियों का दोष केंद्र या पूर्व सरकारों पर डालना समाधान नहीं है।
विधानसभा कार्यवाही पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा परंपरा और नियम का हिस्सा है, लेकिन सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर राजनीतिक प्रस्ताव लाने पर आमादा थी। विपक्ष ने चर्चा में भाग लेकर तीन वर्षों के कार्यकाल की कथित नाकामियों को तथ्यों सहित रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा कई तथ्य गलत ढंग से प्रस्तुत किए गए और जब विपक्ष ने उन्हें सुधारने के लिए बोलने का अवसर मांगा तो अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते भाजपा विधायकों को विरोध स्वरूप सदन के वेल में जाना पड़ा।
वित्तीय आंकड़ों को लेकर सवाल
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का उल्लेख करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि 12वें और 13वें वित्त आयोग के दौरान यूपीए सरकार में हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹18,000 करोड़ के आसपास अनुदान मिला, जबकि 14वें और 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग ₹89,254 करोड़ की सहायता मिली, जो पांच गुना से अधिक है। उन्होंने दावा किया कि पिछले चालीस वर्षों में प्रदेश को लगभग ₹21,000 करोड़ राजस्व घाटा अनुदान मिला, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में ही लगभग ₹89,000 करोड़ प्राप्त हुए।
उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए विभिन्न बयानों का हवाला देते हुए कहा कि 18 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री ने एक दिन ₹23,000 करोड़ ऋण लेने और ₹26,000 करोड़ चुकाने की बात कही, जबकि अगले ही दिन ₹35,400 करोड़ ऋण लेने और ₹27,043 करोड़ चुकाने का उल्लेख किया। वहीं 26 अगस्त 2025 को एक प्रश्न के उत्तर में ₹26,830 करोड़ ऋण लेने और ₹8,253 करोड़ चुकाने की जानकारी दी गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 में मूलधन और ब्याज भुगतान के लिए ₹10,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने पूछा कि विरोधाभासी आंकड़ों के बीच जनता किस पर विश्वास करे।
“तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना उचित नहीं”
जयराम ठाकुर ने कहा कि ऋण लेना असामान्य नहीं है और सभी सरकारें आवश्यकता अनुसार कर्ज लेती हैं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना गंभीर विषय है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग ₹40,672 करोड़ ऋण लिया गया और ₹38,276 करोड़ वापस किया गया। साथ ही अंतिम वित्तीय वर्ष में लगभग ₹6,500 करोड़ की उधार सीमा उपलब्ध होने के बावजूद उसे नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आते ही वर्तमान सरकार ने ₹6,900 करोड़ का कर्ज लिया और उसे भाजपा के खाते में दर्शाया।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ खड़ी है और सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन यदि प्रदेश की आर्थिक स्थिति का गलत चित्र प्रस्तुत कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया गया तो भाजपा तथ्य और आंकड़ों के साथ जवाब देगी।