मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा– “संतुलन जरूरी, नहीं तो विकास प्रभावित होगा”

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देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों द्वारा मुफ्त सुविधाएं देने की संस्कृति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार का समय आ गया है, जो देश के आर्थिक विकास में बाधा बन सकती हैं।
हर किसी को मुफ्त बिजली देने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सवाल उठाया कि हम देश में कैसी कार्य संस्कृति विकसित कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं के तहत उन लोगों को सहायता देना समझ में आता है, जो वास्तव में बिजली बिल चुकाने में असमर्थ हैं। लेकिन जो भुगतान करने में सक्षम हैं और जो नहीं हैं, उनमें भेद किए बिना मुफ्त सुविधाएं देना क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं कहलाएगा?
“फ्री संस्कृति से कार्य संस्कृति पर असर”
मामले की सुनवाई सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, मुफ्त साइकिल और मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं दी जाएंगी तो फिर लोग काम क्यों करेंगे? इससे कार्य संस्कृति प्रभावित हो सकती है।
पीठ ने यह भी कहा कि अधिकांश राज्यों का राजस्व घाटे में है, इसके बावजूद विकास कार्यों की अनदेखी कर मुफ्त योजनाएं घोषित की जा रही हैं। न्यायालय के अनुसार, सरकारों को लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए ताकि वे आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन कर सकें।
चुनाव से पहले योजनाओं की घोषणा पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि चुनाव के आसपास ही ऐसी योजनाओं की घोषणा क्यों की जाती है। न्यायालय ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों और नीति-निर्माताओं को इस प्रवृत्ति पर पुनर्विचार करना चाहिए और एक संतुलन बनाना आवश्यक है।
यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। कंपनी ने उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने के प्रस्ताव के संदर्भ में विद्युत संशोधन नियम, 2024 के एक प्रावधान को चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंता केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से मुफ्त योजनाओं की नीति और उसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर है। न्यायालय ने कहा कि यदि बिना संतुलन के इस तरह की उदारता जारी रही, तो यह देश के आर्थिक विकास में रुकावट बन सकती है।