*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕होलाष्टक का महत्व:- हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले होली के त्योहार से पहले होलाष्टक का पर्व आता है। यह पर्व होली से आठ दिन पहले शुरू होता है। इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं की जाती है।
होलाष्टक के पीछे धार्मिक मान्यताएं और ज्योतिषीय कारण शामिल हैं। इस समय कुछ सावधानियों का पालन करने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष होलाष्टक कब प्रारंभ होगा?
⚜️होलाष्टक की तिथि
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🚩होलाष्टक कब शुरू होगा?:- वैदिक पंचांग के अनुसार, 2026 में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 24 फरवरी को सुबह 7:01 बजे से प्रारंभ होगी। यह तिथि 25 फरवरी को शाम 4:52 बजे तक रहेगी। चूंकि होलाष्टक की शुरुआत अष्टमी तिथि से होती है, इसलिए इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होगा।
⚜️ग्रहों की उग्रता
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🚩होलाष्टक में ग्रहों की स्थिति:- होलाष्टक के दौरान आठ ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिसके कारण शुभ कार्य नहीं किए जाते। यह अवधि अष्टमी से पूर्णिमा तक होती है, और हर दिन एक ग्रह उग्र रहता है। इस उग्रता का शुभ कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे जीवन में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
ज्योतिष के अनुसार, अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र होते हैं। इसलिए होलाष्टक के आठ दिनों में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
⚜️पूजा का महत्व
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🚩शुभ कार्यों की मनाही:- हालांकि होलाष्टक में शुभ कार्यों की मनाही है, लेकिन इस दौरान देवताओं की पूजा और अर्चना की जा सकती है।
*🚩हरिऊँ🚩*