देवभूमि न्यूज 24.इन
मंडी। जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष, ने दिल्ली स्थित हिमाचल सदन में एआई समिट के दौरान प्रदर्शन करने वाले युवकों के ठहरने की खबरों को लेकर प्रदेश की सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
मंडी से जारी प्रेस बयान में जयराम ठाकुर ने तीखा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि क्या यही मुख्यमंत्री का ‘व्यवस्था परिवर्तन’ है, जिसके तहत उस स्थान पर असामाजिक तत्व कमरा लेकर हुड़दंग मचा रहे थे, जहां स्वयं मुख्यमंत्री ठहरे हुए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी और उनकी केंद्र सरकार के खिलाफ साजिश रचने वालों को न केवल हिमाचल सदन में पनाह दी गई, बल्कि वहां कथित तौर पर पैसों के अवैध लेन-देन की सूचनाएं भी सामने आई हैं। इसे उन्होंने राज्य की छवि के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकारी संपत्ति का उपयोग यदि देश के शीर्ष नेतृत्व के विरुद्ध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने पूछा कि आखिर किसके इशारे पर प्रदर्शनकारियों को सदन में ठहराया गया और उन्हें दिल्ली में कौन-सा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। उनका कहना था कि बिना ऊंचे रसूख के ऐसे संवेदनशील स्थान पर ठहरना संभव नहीं है।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जनता का धन सरकार के कार्यों को सही ठहराने के लिए वकीलों पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की तह तक जाएं और स्पष्ट करें कि इसके पीछे कौन-सी ताकतें सक्रिय थीं।
उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमाचल की गरिमा को धूमिल नहीं होने दिया जाएगा और सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर सरकारी अतिथि गृह कथित रूप से ‘साजिश का अड्डा’ कैसे बन गया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस जांच में हिमाचल सदन का नाम सामने आया है तो यह सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।