कोटी-काफोटा सड़क की हालत पर उठे सवाल, समाजसेवी नाथूराम चौहान ने सरकार को घेरा

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देवभूमि न्यूज 24.इन
शिलाई। कोटी-कफोटा सड़क, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क के निर्माण के बाद अब तक इसमें किसी प्रकार का ठोस सुधार या गुणवत्तापूर्ण रखरखाव कार्य नहीं किया गया है।
यह सड़क विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दो राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को आपस में जोड़ती है। साथ ही यह मार्ग प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान के पैतृक गांव तक भी पहुंच प्रदान करता है, जिससे इसका राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी बढ़ जाता है।
जानकारी के अनुसार इस सड़क पर प्रति किलोमीटर लगभग 93 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता उस अनुपात में दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि एफडीआर तकनीक से बनाए जाने वाले इस मार्ग पर धूल और मिट्टी के अलावा कुछ नजर नहीं आता, जिससे खर्च की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय समाजसेवी एवं पर्यावरणविद नाथूराम चौहान ने उद्योग मंत्री और लोक निर्माण विभाग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह जनता के पैसों की खुली बर्बादी है। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो विभागीय अधिकारियों ने संज्ञान लिया और न ही संबंधित मंत्रियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई हुई।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आवागमन में भारी दिक्कतें आ रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।