देवभूमि न्यूज 24.इन
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सुझाव मांगे हैं। अभी यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम निर्णय व्यापक परामर्श के बाद लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की चिंता
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि बच्चों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग छात्रों की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग से कुछ छात्र गलत संगति या जोखिमपूर्ण गतिविधियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
कुलपतियों के साथ बैठक
सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ हुई बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में स्कूली छात्रों के मोबाइल उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू हैं। कर्नाटक भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव केवल 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों तक सीमित रहेगा; वयस्क छात्रों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रस्तावित कदम का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि यदि कम उम्र के छात्रों के लिए मोबाइल उपयोग नियंत्रित किया जाए तो
छात्र पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
डिजिटल लत (सोशल मीडिया/मोबाइल) से बचाव होगा।
मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर होगा।
आगे की प्रक्रिया
सरकार अंतिम निर्णय से पहले शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श करेगी। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो कर्नाटक उन राज्यों/देशों में शामिल हो जाएगा जहां स्कूली छात्रों के लिए मोबाइल उपयोग पर सख्त नियम हैं।
इसी तरह, जर्मनी में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नियंत्रण की योजना पर चर्चा चल रही है। वहां बच्चों के लिए उपयुक्त सामग्री सुनिश्चित करने हेतु एक विशेष ऐप विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।