सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गैर-कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन पर रिपोर्ट जारी की, औषधीय पौधों के लिए दो एमओए हस्ताक्षरित

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देवभूमि न्यूज 24.इन
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बन डाईऑक्साइड एमिशन्सः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर राज्य में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए Dabur India Limited तथा मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ दो मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए।
डाबर इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता
पहले एमओए के तहत डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश के किसानों को प्रतिवर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे (प्रति किस्म एक लाख) और दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधे (प्रति प्रजाति 10 लाख) उनकी पारिस्थितिकीय अनुकूलता के अनुसार उपलब्ध करवाएगी।
निम्न एवं मध्य पहाड़ी क्षेत्र: आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर के पौधे हिमाचल प्रदेश के ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर तथा निचले शिमला क्षेत्र में वितरित किए जाएंगे।
मध्य से उच्च पहाड़ी क्षेत्र: जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल के पौधे कुल्लू, चंबा, मंडी, ऊपरी शिमला और किन्नौर जिलों में दिए जाएंगे।
अल्पाइन प्रजातियां: अतीस और विष (जड़ी-बूटियां) किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उपलब्ध करवाई जाएंगी।
सोलन में औषधीय खेती को बढ़ावा
दूसरा एमओए मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों के लिए हस्ताक्षरित किया गया है। इसके तहत सोलन जिले में चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और वैल्यू चेन विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
छह प्राथमिकता वाली प्रजातियां—हल्दी (कुर्कुमा लोंगा), अश्वगंधा (विथानिया सोम्निफेरा), शतावरी (एस्पैरागस रेसमोसम), तुलसी (ओसिमम सैंक्टम), चिरायता (स्वर्टिया चिरायिता) और हिमालयन जेंटियन (जेंटियाना कुरू)—की खेती की जाएगी। प्रारंभिक चरण में 108 बीघा भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा तथा आसपास की पंचायतों को भी जोड़ा जाएगा।
हरित ऊर्जा राज्य बनने की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है तथा युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जा रही है।
नालागढ़ में Oil India Limited के सहयोग से एक मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में राज्य ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बनने की दिशा में कार्य करेगा।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देते हुए अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन पर चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बादल फटना, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 23,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि हिमालय की आत्मा है। ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत इसकी पहचान हैं। राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा।
इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, हरीश जनारथा, सचिव (पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन) एस.के. सिंगला, यूएनईपी क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन की सचिवालय प्रमुख डॉ. डर्वुड जैल्के, मार्टिना ओटो, आईजीएसडी की इंडिया प्रोग्राम डायरेक्टर ज़ेरिन ओशो, निदेशक डीसी राणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।