देवभूमि न्यूज 24.इन
चंडीगढ़। पूर्व सैनिकों के इलाज के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ईसीएचएस) में ट्राइसिटी क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी मरीज भर्ती, नकली बिल और बनावटी टेस्ट रिपोर्ट के जरिए योजना के तहत बड़े पैमाने पर क्लेम लिए गए।
मंगलवार को Central Bureau of Investigation (सीबीआई) की टीमों ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला समेत ट्राइसिटी के विभिन्न निजी अस्पतालों और सेक्टर-38 स्थित एक धार्मिक स्थल में संचालित मेडिकल सेंटर पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि सेक्टर-15 और सेक्टर-38 के कुछ निजी अस्पताल इस कथित फर्जीवाड़े के केंद्र में हैं। देर रात तक सीबीआई टीमें रिकॉर्ड खंगालती रहीं।
ऐसे खेला गया फर्जीवाड़े का खेल
जांच में सामने आया है कि मरीजों को बिना जरूरत निजी अस्पतालों में भर्ती दिखाया जाता था। कई मामलों में मरीजों को केवल ओपीडी में बुलाया गया, जबकि कागजों में उन्हें एक-दो सप्ताह तक भर्ती दर्शाकर 5 से 10 लाख रुपये तक के बिल तैयार किए गए।
महंगी दवाओं के फर्जी बिल बनाए गए।
लैब की नकली रिपोर्ट तैयार कर मरीज को गंभीर दिखाया गया।
बिना ऑपरेशन के ऑपरेशन का बिल जोड़ दिया गया।
मेडिकल फाइलों में फर्जी दस्तावेज संलग्न कर क्लेम दाखिल किए गए।
बताया जा रहा है कि इस कथित घोटाले में निजी अस्पतालों, कुछ डॉक्टरों, प्राइवेट लैब और एक निजी एजेंसी की मिलीभगत की आशंका है। यह एजेंसी ईसीएचएस के तहत पंजीकृत मरीजों को अस्पतालों तक लाने का काम करती थी। बिल की पेमेंट होने के बाद डॉक्टर, अस्पताल, लैब और एजेंसी के बीच कथित रूप से राशि का बंटवारा किया जाता था।
करोड़ों के फर्जी क्लेम
सूत्रों के अनुसार, कई फर्जी बिल 5 से 10 लाख रुपये तक के बनाए गए, जबकि दर्जनों बिल 2 से 5 लाख रुपये के हैं। एक दर्जन से अधिक डॉक्टरों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।
सीबीआई ने संबंधित अस्पतालों के रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।