होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया, अशुभ प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

Share this post


देवभूमि न्यूज 24.इन
हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन करते समय भद्रा काल का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। वर्ष 2026 में भी होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा, इसलिए सही मुहूर्त में ही दहन करना शुभ माना गया है। आइए जानते हैं भद्रा काल क्या है, इसमें होलिका दहन क्यों वर्जित है और अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या उपाय करने चाहिए।
: भद्रा काल का समय
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में भद्रा काल 3 मार्च को प्रातः 01 बजकर 25 मिनट से 04 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ माना जाएगा। फाल्गुन पूर्णिमा की रात 2 मार्च को भद्रा से पहले होलिका दहन किया जाना श्रेष्ठ रहेगा।
क्या होता है भद्रा काल?
ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ समय माना गया है। यह काल चंद्रमा की स्थिति और करण के आधार पर निर्धारित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य को आरंभ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कार्य में बाधा, विवाद या अनिष्ट की आशंका बढ़ सकती है।

भद्रा में होलिका दहन क्यों नहीं किया जाता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा को उग्र स्वभाव वाली माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों का फल अपेक्षित रूप से नहीं मिलता।

पौराणिक कथा के अनुसार होलिका दहन का संबंध भक्त प्रहलाद और असुरराज हिरण्यकश्यप से जुड़ा है। जब होलिका अग्नि में बैठी, तब दहन शुभ मुहूर्त में हुआ था और भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई। इसी परंपरा का पालन करते हुए आज भी होलिका दहन शुभ मुहूर्त में ही किया जाता है। मान्यता है कि भद्रा में होलिका दहन करने से घर में अशांति, विवाद और आर्थिक हानि की संभावना बढ़ सकती है।
भद्रा से बचने के उपाय
भद्रा काल में केवल पूजा की तैयारी करें, दहन न करें।
भगवान विष्णु और शिव जी का स्मरण करें।
घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करें।
भद्रा समाप्त होते ही विधि-विधान से होलिका पूजन और दहन करें।
परिवार के साथ मिलकर प्रार्थना करें और अग्नि की परिक्रमा करें।
होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व सिखाता है कि सत्य, भक्ति और धर्म की सदैव विजय होती है। सही मुहूर्त में होलिका दहन करने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

,,, के अवसर पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार शुभ मुहूर्त में ही दहन करने से अनिष्ट से बचाव और मंगल फल की प्राप्ति होती है।