श्रीराम मंदिर अंदोरा में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा प्रसंग में श्रोताओं को भाव विभोर किया।

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युग चक्र, जग चक्र व काल चक्र एक साथ घुमाने वाले अखिलात्मा भगवान श्री कृष्ण ने आदि ब्रह्मा को क्षमादान नहीं दिया।-आचार्य गणेश दत्त शास्त्री।

राजीव शर्मन,ब्यूरो
देवभूमि न्यूज 24.इन
ऊना, हिमाचल प्रदेश

धार्मिक नगरी श्री छोटा हरिद्वार की सदानीरा सोमभद्रा-स्वां नदी सन्निकट श्री राम मंदिर अन्दौरा-अम्ब में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा की अविरल भागीरथी गंगा बहा कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। व्यास पीठासीन आचार्य गणेश दत्त शास्त्री जी ने सारगर्भित प्रवचन से भागवत कथा का साध-संगत को रसास्वादन करवाया। ऋषि शुकदेव जी से राजा परीक्षित ने प्रश्न किया कि हे ऋषिवर! भगवान कृष्ण ने गिरिराज पर्वत की धृष्टता पर क्षमादान दे दिया किन्तु ब्रह्मा जी को क्षमादान नहीं दिया?
इस पर ऋषिवर शुकदेव जी ने राजा की शंका का बहुविधी निवारण किया। ऋषिवर शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को समझाया कि ईश्वर का स्वरूप श्रद्धामयी हुआ करता है। इस सृष्टि के आदि,मध्य व अंत का जगदीश्वर स्वंय अजन्मा भगवान शाश्वत सत्य है।
श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सविस्तार समझाया कि ब्रह्मा जी ने बाल रूप कृष्ण को साधारण बालक मानकर उनके बाल सखा श्री दामा,श्री मधुमंगल व श्री मनसुखा को छद्मी छल बल से एक साल तक अलग-विलग कर दिया था। अपनी गलती का एहसास होने पर ब्रह्मा जी ने भगवान जी के सखाओं को मुक्त कर दिया।
यह अलग -थलग करने की धृष्टता भगवान को कदापि रास नहीं आई।
हालांकि गिरिराज ने सात दिनों तक मूसलाधार वर्षा करके वृन्दावन को डूबोने का अभिमान किया था।
ऋषि शुकदेव जी ने कहा कि हे राजा परीक्षित! इस दौरान सभी वृन्दावन के लोग गोवर्धन पर्वत उठाने के लिए एक जुट हो गए। भगवान जी को यह धृष्टता रास आई,इसमें सभी एकत्रित हुए।
हालांकि भगवान ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर सात दिनों तक पर्वत उठाये रखा था।


जब बृजवासियों को अहम हुआ कि उन्होंने ने भी अपने यथाविधि बल से गोवर्धन उठाने का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सोलह कला सम्पन्न महायोगेश्वर को भान हुआ तो उन्होनें थोड़ा सा कनिष्ठ उंगली को हटाया तो सभी बृजवासी दबने लगे थे। ऐसे में श्री कृष्ण भगवान जी ने कनिष्ठ उंगली से गिरिराज को ऊंचा कर दिया। ऐसे में बृजवासियों द्वारा लगाए गये निष्फल बल का बखूबी ज्ञान हो कर लज्जा महसूस हुई।
जब बृजवासियों ने भगवान को अवतारी मानना चाहा तो भगवान जी ने पुन: त्रिगुणात्मक माया से सबको यह कहकर बांध दिया कि यह बल सखाओं द्वारा मक्खन खिलाने से प्राप्त हुआ है। इसमें गोपियों की भी अपार कृपा मिली है।
श्री कृष्ण भगवान जी ने यह भी कहा कि यह सब राधा शक्ति के कारण ही सम्भव हो पाया है।
अत: ऋषिवर शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को बतलाया कि यह सब भगवान श्री कृष्ण जी की अलौकिक लीला का ही चमत्कार है।
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा की व्यास पीठ पर आसीन आचार्य गणेश दत्त शास्त्री ने बोधगम्य प्रवचन से साध संगत के साथ साथ आज रविवार के दिन कथा स्थल पर एकत्रित भावी पीढ़ी को भी भावी उज्जवल भविष्य का सार्थक मार्ग प्रशस्त करने का भी एक सूत्रीय आह्वान किया।