होली की कथाएं: शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण और राक्षसी ढुंढी से जुड़ी पौराणिक कहानियां

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 *देवभूमि न्यूज 24.इन*

⭕होली 2026: देशभर में आज रंगों का पर्व होली हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. हर ओर रंगों की बौछार है, लोग एक-दूसरे को गले लगाकर अबीर और गुलाल लगा रहे हैं. यह त्योहार प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है.

हालांकि इसकी शुरुआत का सटीक समय ज्ञात नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. इन कथाओं का संबंध शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण और राक्षसी ढुंढी से बताया जाता है.

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान शिव कैलाश पर्वत पर गहन ध्यान में लीन थे. तभी कामदेव ने उनका ध्यान भंग करने का प्रयास किया. शिव जी क्रोधित होकर अपनी तीसरी आंख खोलते हैं और कामदेव भस्म हो जाते हैं. उनकी पत्नी रति शोकाकुल होकर शिव से प्रार्थना करती हैं. रति की विनती स्वीकार कर शिव कामदेव को पुनः जीवन प्रदान करते हैं. इस घटना से प्रसन्न होकर देवताओं ने फाल्गुन पूर्णिमा पर रंगों का उत्सव मनाया, जिसे होली कहा गया.

होली की एक अन्य कथा राधा और श्रीकृष्ण से जुड़ी है. कृष्ण बचपन में अपनी माता यशोदा से शिकायत करते कि राधा गोरी क्यों हैं और वे स्वयं सांवले क्यों हैं. यशोदा ने उन्हें सुझाव दिया कि वे राधा को अपने रंग में रंग दें. इसके बाद कृष्ण अपने मित्रों संग राधा और उनकी सखियों के पास पहुंचे और रंगों से खेलते हुए उन्हें अपने रंग में रंग दिया. यही से रंगों की होली की परंपरा शुरू हुई.

होली से जुड़ी एक तीसरी कथा ढुंढी नामक राक्षसी से संबंधित है. राजा पृथु के समय में यह राक्षसी बच्चों को परेशान करती थी और उन्हें खा जाती थी. नगरवासी उससे भयभीत थे. फाल्गुन पूर्णिमा पर बच्चों ने आग जलाकर शोर मचाया और कीचड़ फेंककर ढुंढी को नगर से भगा दिया. उसके जाने से नगर में खुशी फैल गई और लोगों ने रंग खेलकर उत्सव मनाया.

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. शिव-पार्वती और कामदेव की कथा, राधा-कृष्ण की प्रेम कथा और ढुंढी राक्षसी की कहानी इस पर्व को और भी रोचक बनाती हैं. इन कथाओं से यह स्पष्ट होता है कि होली आनंद, प्रेम और बुराई पर विजय का प्रतीक है.

🌸होली की बहुत-बहुत शुभकांमनायें🌸

           *🚩#हरिऊँ🚩*
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