देवभूमि न्यूज 24.इन
उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री छिन्नमस्तिका धाम (माता चिंतपूर्णी) को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से और अधिक सुलभ बनाने हेतु टिम्बर ट्रॉली (रोपवे) परियोजना की मांग तेज हो गई है। क्षेत्र के समाजसेवियों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस बहु-आयामी परियोजना से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि यातायात दबाव और भीड़-भाड़ की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
बताया जा रहा है कि पिछले दो दशकों से मंदिर तक सुगम और व्यवस्थित पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। दौलतपुर, देहरा-कांगड़ा, श्री डेरा बाबा बड़भाग सिंह और होशियारपुर-गगरेट की दिशाओं से टिम्बर ट्रॉली द्वारा जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि सड़क मार्ग पर बढ़ते यातायात और संभावित भगदड़ की स्थिति से राहत मिल सके।
दौलतपुर रेलवे स्टेशन मंदिर के सर्वाधिक समीप स्थित प्रमुख रेलवे स्टेशन माना जाता है। यदि इसे टिम्बर ट्रॉली परियोजना से सीधे जोड़ा जाता है, तो धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम मिल सकता है। इसी प्रकार ऊना जिले के अम्ब उपमंडल तथा गगरेट के कुनैरन-चिंतपूर्णी रेलवे स्टेशनों से भी हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष माता के दर्शन हेतु पहुंचते हैं। इन सभी स्टेशनों को रोपवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना को क्षेत्र के विकास के लिए परिवर्तनकारी बताया जा रहा है।
अम्बिकानगर-अम्ब साहित्य परिषद, जिला ऊना के अध्यक्ष एवं साहित्यकार राजीव शर्मन ने इस परियोजना को शीघ्र क्रियान्वित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि टिम्बर ट्रॉली परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो माता चिंतपूर्णी धाम उत्तर भारत में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस परियोजना के लिए बजट प्रावधान और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने की मांग भी उठाई है। स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और पर्यटन विकास को भी नई गति देगी।