देवभूमि न्यूज 24.इन
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद बने युद्ध जैसे हालात का असर अब पंजाब की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिम के चलते राज्य का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे हर महीने करीब 1400 करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
एक्सपोर्ट पर ब्रेक, 1500 कंटेनर रुके
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब से हर महीने लगभग 1500 कंटेनरों के जरिए होने वाला निर्यात फिलहाल ठप हो गया है। मिडिल ईस्ट के समुद्री मार्ग असुरक्षित माने जाने के कारण शिपिंग कंपनियों ने नई बुकिंग लेना बंद कर दिया है। विदेशी खरीदार पुराने ऑर्डर या तो रद्द कर रहे हैं या होल्ड पर डाल रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आयातकों के बीच भुगतान विवाद भी गहरा रहा है।
पहले दुबई के रास्ते ईरान को जाने वाला सामान अब पूरी तरह रुक गया है। अब जहाजों को अफ्रीका के लंबे समुद्री मार्ग से होकर भेजने की योजना बन रही है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे।
चावल उद्योग पर सबसे बड़ी मार
इस संकट का सबसे बड़ा असर चावल उद्योग पर पड़ा है। डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेन ट्रेड के पूर्व अधिकारियों के अनुसार, करीब 6,000 करोड़ रुपये का भुगतान फंसा हुआ है, जबकि हजारों करोड़ रुपये का माल ट्रांज़िट में अटका है।
सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और यमन जैसे पांच बड़े खाड़ी देशों को भारत के कुल 29,892 करोड़ रुपये के चावल निर्यात में पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 11,956 करोड़ रुपये है, जो अब खतरे में बताई जा रही है।
सऊदी अरब में पंजाब का हिस्सा: 4,076 करोड़ रुपये
इराक में हिस्सा: 2,880 करोड़ रुपये
इंजीनियरिंग और अन्य सेक्टर भी प्रभावित
जालंधर, लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक शहरों से मिडिल ईस्ट जाने वाला करीब 3,000 करोड़ रुपये का इंजीनियरिंग सामान भी प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा निम्न सेक्टरों पर भी संकट गहराया है:
स्पोर्ट्स सामान: 483.04 करोड़ रुपये
टेक्सटाइल: 360.65 करोड़ रुपये
हल्दी पाउडर: 280.14 करोड़ रुपये
मीठे बिस्कुट: 186.46 करोड़ रुपये
कृषि मशीनरी के पार्ट्स
ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समुद्री रूट के कारण माल ढुलाई की दरें तीन गुना तक बढ़ सकती हैं। कुछ विदेशी शिपिंग लाइनों ने ‘इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज’ भी लागू कर दिया है, जिससे कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी हो रही है।
16,694 करोड़ के सालाना निर्यात पर अनिश्चितता
पंजाब से सालाना लगभग 16,694 करोड़ रुपये का निर्यात होता है, जिसका बड़ा हिस्सा फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यदि मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचता है, तो राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को वैकल्पिक समुद्री मार्गों, लॉजिस्टिक सब्सिडी और निर्यातकों को राहत पैकेज जैसे कदमों पर शीघ्र निर्णय लेना होगा, ताकि पंजाब की अर्थव्यवस्था को बड़े झटके से बचाया जा सके।