देवभूमि न्यूज 24.इन
⭕सनातन धर्म में जिस तरह से हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है, उसी तरह से हर दिन किसी न किसी ग्रह का भी माना जाता है. गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और देवताओं के गुरु और नौ ग्रहों में महत्वपूर्ण बृहस्पति देव को समर्पित किया गया है.
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन किया जाता है. इससे जीवन में खुशहाली आती है.
इस दिन बृहस्पति देव की भी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं. पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली में गुरु की महादशा कितने सालों तक चलती है? अगर नहीं तो आइए इस बारे में जानते हैं. साथ ही जानते हैं कि गुरुवार के दिन बृहस्पति देव को कैसे प्रसन्न करें?
⚜️गुरु की महादशा 16 साल तक चलती है
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ज्योतिषियों के अनुसार, गुरु की महादशा 16 साल तक चलती है. इस दौरान सभी शुभ और अशुभ ग्रहों की अंतर्दशा भी चलती है. इनमें सबसे पहली होती है गुरु की अंतर्दशा, जिसकी समय अवधि दो साल होती है. इसके बाद शनि की अंतर्दशा चलती है. गुरु की महादशा के दौरान शुभ ग्रहों की अंतर्दशा से शुभ फल मिलते हैं. वहीं, राहु या केतु की अंतर्दशा में शुभ कामों में असफलता मिलती है. राहु और केतु के साथ गुरु रहते हैं, तो चांडाल दोष बनता है.
⚜️गुरु को इस तरह करें प्रसन्न
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बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार को भक्ति भाव से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें. पीले रंग के कपड़े पहनें. पीले रंग की चीजों जैसे- पीले रंग के कपड़े, पीले फल, चना, केला, पपीता आदि चीजों का दान करें. लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें. पूजा के समय केसर मिश्रित दूध से भगवान विष्णु का अभिषेक करें. सूर्य देव को अर्घ्य दें. केले के पौधे को हल्दी मिश्रित जल का अर्घ्य दें. इन सभी उपायों को करने से गुरु प्रसन्न होते हैं.
🚩ऊँबृंबृहस्पतये_नम:🚩
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