जानिए कहां है भगवान गणेश का असली मस्तक

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देवभूमि न्यूज 24.इन

धार्मिक मान्यतानुसार हिन्दु धर्म मे गणेश जी सर्वोपरी स्थान रखते है ! सभी देवी देवताओं मे इनकी पूजा अर्चना सर्वप्रथम की जाती है, गणेश जी विध्न विनायक है ! भगवान गणेश गजानन के नाम से भी जाने जाते है, क्योकी इनका मुख हाथी का है !

क्या आपको पता है की भगवान गणेश का सिर कटने के बाद हाथी के बच्चे का मुख लगा.लेकिन उनका असली सिर कहां गया ?

इसके बारे मे आज आपको एक रोचक जानकारी देते है !

ब्राह्मण्ड पुराण मे कहा गया है की जिस समय माता पार्वती ने गणेश को जन्म दिया उस समय इंद्रदेव समेत कई देवी देवता उनके दर्शन के लिए उपस्थित हुए, जिस समय ये देवी देवता पधारे उसी समय न्यायाधिश कहे जाने वाले शनिदेव भी वहां गये, शनिदेव के बारे मे कहा जाता है की उनकी क्रुर दृष्टि जहां भी पडेगी वहां हानी होगी.उनकी उपस्थिति से माता पार्वती रुष्ट हो गई.फिर भी शनिदेव की दृष्टि जब गणेश और दृष्टिपात होते ही गणेश का मस्तक अलग होकर चन्द्रमंडल मे चला गया !

इसी तरह दुसरे प्रसंग के मुताबिक एक बार की बात है की माता पार्वती स्नान करने जा रही थी. वह चाहती थी कीस्नान करते समय उन्हे कोई परेशान ना करे, तब उन्होने स्नान से पहले अपने मैल से एक सुन्दर बालक को उत्पन्न किया, और उसे अपना द्वारपाल बनाकर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश दिया.उसी समय कही से भगवान शिव वहां पर आये और द्वार के अंदर प्रवेश करने लगे.तब बालक ने उन्हे बाहर ही रोक दिया !

शिवजी ने उस बालक को कई बार समझाया लेकिन वह नही माना, इस पर शिव गणों ने भगवान के कहने पर उस बालक को द्वार से हटाने के लिए उससे भयंकर युद्ध किया, लेकिन उसे कोइ पराजित नही कर सका.बालक के पराक्रम और हठधर्मिता से क्रोधित होकर शिव जी ने उस बालक का सिर धड से अलग कर दिया जो चन्द्रलोक चला गया !

जब माता पार्वती स्नान करके निकली तो अपने पुत्र का कटा हुआ सिर देखकर क्रोधित हो उठी और शिव जी से उसे पुनः जीवित करने के लिए कहा. उन्होने कहा की अगर उनके पुत्र को जीवित नही किया गया तो प्रलय आ जायेगी.

यह सब देखकर सारे देवी देवता भयभित हो गए. तब देवर्षि नारद ने पार्वती जी को शांत किया और बालक को जिन्दा करने का अनुरोध भगवान शिव से किए !

समस्या यह थी की कटा हुआ सिर वापस से धड के साथ जुड नही सकता था ,अतः यह तय हुआ की अगर किसी दुसरे जिव का सिर मिल जाए तो यह बालक जीवित हो जायेगा.
शिव के आदेशानुसार शिवगणों ने जब दुसरा सिर खोजने के लिए निकले तो एक जंगल मे एक हाथी का बच्चा मिला.शिवगणो ने उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आए, इसके पश्चात शिव जी ने उस गज के कटे हुए मस्तक को बालक के धड पर रख कर उसे पुनर्जीवित कर दिया.और इस बालक का नाम गणेश पडा !

ऐसी मान्यता है की गणेश का असल मस्तक चंद्रमंडल मे है. इसी आस्था से भी धर्म परम्पराओं मे संकट चतुर्थी तिथी पर चंद्र दर्शन व अर्ध्य देकर श्री गणेश की उपासना भक्ति द्वारा संकटनाशक मंगल कामना की जाती है !

✍️ज्यो:शैलेन्द्र सिंगला पलवल हरियाणा mo no/WhatsApp no9992776726
नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान