देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने अदालत के आदेशों का समय पर पालन न करने और बाद में देरी से अपील या रिव्यू याचिका दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जाता तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई की जा सकती है।
Justice Ahsanuddin Amanullah और Justice R. Mahadevan की पीठ ने कहा कि अगर कोई अधिकारी तय समय सीमा के भीतर कोर्ट को किसी वास्तविक कठिनाई के बारे में अवगत नहीं कराता, तो बाद में प्रशासनिक अड़चन या आदेश लागू करना असंभव होने का तर्क देकर अवमानना की कार्रवाई से नहीं बचा जा सकता।
पीठ ने कहा कि हाल के समय में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि अदालत के आदेशों का लंबे समय तक पालन नहीं किया जाता और जब अवमानना याचिका दाखिल होती है, तब बहुत देर से अपील दायर की जाती है। अदालत ने कहा कि देरी से अपील दाखिल करना अपवाद होना चाहिए, लेकिन अब यह नियम बनता जा रहा है, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट को ऐसे “बेईमानी वाले मामलों” से सख्ती से निपटना चाहिए, खासकर तब जब वे Article 12 of the Constitution of India के तहत ‘स्टेट’ या उससे जुड़ी संस्थाओं से संबंधित हों। अदालत ने कहा कि यदि इन मामलों में सख्ती नहीं बरती गई तो आम लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
क्या है मामला
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों पर कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने संबंधी अदालत के आदेश का पालन न करने का आरोप था। अदालत ने इस मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आदेश लागू करने के लिए 15 दिनों का अंतिम अवसर दिया है।