देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली। राजधानी में दशकों पहले गायब हो चुकी एक झील का सुराग 1932 के पुराने नक्शे में मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिल्ली में Bhalswa Lake के उत्तर की ओर करीब दो मील लंबे पानी के क्षेत्र के संकेत मिले हैं। यह इलाका आज के Kadipur के आसपास आता है, लेकिन वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर अब निर्माण हो चुका है।
यह जानकारी विरासत संरक्षण संस्था Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (INTACH) ने पुराने नक्शों के अध्ययन के बाद सामने रखी है। संस्था ने इस संबंध में Vinai Kumar Saxena और Delhi Development Authority को पत्र लिखकर इस झील को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया है।
INTACH के प्रिंसिपल डायरेक्टर Manu Bhatnagar के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी लगभग 10 एकड़ में फैला एक बड़ा गड्ढा मौजूद है, जिससे संकेत मिलता है कि यहां पहले जलाशय रहा होगा और इसे फिर से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि आसपास की जमीन को एक छोटे बायोडायवर्सिटी रिजर्व या अर्बन फॉरेस्ट में बदला जा सकता है, जहां लगभग 8,000 पेड़ लगाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलाके की प्राकृतिक बनावट ऐसी है जहां पानी आसानी से एकत्रित हो सकता है। हालांकि, झील के पुनर्निर्माण और संरक्षण के लिए संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।
इस प्रस्ताव पर अभी तक DDA की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले भी INTACH ने पुराने नक्शों के अध्ययन के आधार पर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के Narela के टिकरी खुर्द इलाके में एक अन्य जलाशय की पहचान की थी। इसके बाद मामला National Green Tribunal तक पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने उस जलाशय को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि हाल ही में आयोजित प्रदर्शनी “द रोमांस ऑफ ओल्ड मैप्स: ट्रेसिंग लॉस्ट लैंडस्केप्स” में 1807 से 1984 तक के पुराने नक्शों के जरिए दिल्ली के प्राकृतिक तंत्र, जलाशयों और रास्तों के विकास और बदलाव को प्रदर्शित किया गया। इन नक्शों से यह भी सामने आया कि समय के साथ दिल्ली के कई जंगलों और वेटलैंड्स की जगह कंक्रीट के ढांचे बनते चले गए।