ग्रीन टू गोल्ड’ मिशन को मिली वैज्ञानिक मजबूती, नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित हुई कैनबिस क्वालिटी टेस्टिंग एंड रिसर्च लैब

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देवभूमि न्यूज 24
नौणी। हिमाचल प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी ‘ग्रीन टू गोल्ड’ मिशन को नई गति देने के लिए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय ने राज्य में औद्योगिक भांग (इंडस्ट्रियल कैनबिस) की वैध एवं नियंत्रित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अत्याधुनिक ‘कैनबिस क्वालिटी टेस्टिंग एंड रिसर्च लेबोरेटरी’ की स्थापना की है।
यह प्रयोगशाला हिमाचल प्रदेश में भांग को अवैध व्यापार की छवि से बाहर निकालकर एक वैध, अनुसंधान-आधारित और आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब राज्य सरकार औद्योगिक भांग की नियंत्रित खेती के लिए नियम एवं नीतियां तैयार कर रही है।
सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश में उगाई जाने वाली औद्योगिक भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम रहे। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार 0.3 प्रतिशत से कम टीएचसी वाली भांग गैर-नशीली श्रेणी में आती है और इसका उपयोग नशे के लिए नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत, यह फाइबर, बीज, औषधियों तथा वेलनेस उत्पादों के निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भांग को केवल अवैध नशीले पदार्थों के व्यापार से जोड़कर देखा जाता रहा, लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसके औषधीय और औद्योगिक महत्व को व्यापक मान्यता मिल रही है। दर्द प्रबंधन, सूजन नियंत्रण और विभिन्न प्रकार की दवाओं के निर्माण में इसके उपयोग पर लगातार शोध हो रहे हैं। वहीं औद्योगिक भांग से तैयार होने वाले कपड़े, परिधान, कागज, पैकेजिंग सामग्री और अन्य पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
नई परीक्षण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला से औद्योगिक भांग की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच, मानकों का पालन सुनिश्चित करने तथा भविष्य में इस क्षेत्र में अनुसंधान और उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इससे किसानों के लिए आय के नए अवसर सृजित होने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।