‘लॉकप्रिय’ सरकार पर जयराम का हमला, बोले- तालाबंदी में सुकून मिलता है सुक्खू को

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संस्थानों पर सियासी संग्राम तेज; पूर्व सीएम का दावा- 2,500 से ज्यादा संस्थान बंद, 123 फिर खोलने पड़े
देवभूमि न्यूज 24
शिमला : हिमाचल में सरकारी संस्थानों को बंद करने का मुद्दा एक बार फिर सियासी तूफान बन गया है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘लॉकप्रिय’ मुख्यमंत्री करार दिया। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में जयराम ने तंज कसा कि “मुख्यमंत्री को तालाबंदी में सुकून मिलता है।”
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के पहले ही दिन बिना समीक्षा एक हजार से अधिक संस्थानों को बंद कर दिया था। अब बंद किए गए सरकारी संस्थानों का आंकड़ा 2,500 के पार पहुंच चुका है। उन्होंने सरकार के ‘नीड बेस्ड असेसमेंट’ के तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के महज 24 घंटे के भीतर ऐसा कौन सा सर्वे हो गया था, जिसके आधार पर इतने बड़े फैसले ले लिए गए।
123 संस्थान फिर खोलने से फैसलों पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को बाद में बंद किए गए 123 संस्थान दोबारा खोलने पड़े। इससे सरकार के शुरुआती फैसलों की समीक्षा और उनके आधार पर भी सवाल खड़े होते हैं। जयराम ने कहा कि भाजपा सरकार के समय खोले गए संस्थान स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग पर खोले गए थे। कांग्रेस सरकार नए संस्थान खोलने में सक्षम नहीं है, इसलिए पहले से चल रहे संस्थानों को बंद करना ही उसकी नीति बन गई है।
एक शिक्षक है तो स्कूल बंद नहीं, भर्ती करे सरकार
एक शिक्षक वाले स्कूलों को बंद करने के सरकार के तर्क पर भी जयराम ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों में शिक्षक कम हैं तो सरकार को शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए, स्कूलों पर ताला नहीं लगाना चाहिए। विधानसभा में दिए गए जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में जेबीटी और टीजीटी के करीब 6,000 पद खाली हैं। वहीं, 3,214 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक-एक शिक्षक तैनात है।
‘कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री को अपने क्षेत्र में बुलाने से डरते हैं’
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि संस्थान बंद करने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। इसका असर अब कांग्रेस के विधायकों पर भी दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के विधायक भी मुख्यमंत्री को अपने क्षेत्रों में बुलाने से बच रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं क्षेत्र में पूर्व भाजपा सरकार के समय खोला गया कोई संस्थान मिल गया तो उसे भी डिनोटिफाई न कर दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के करीब चार साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के पास जनता के बीच बताने के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसलिए सरकार भाजपा के समय शुरू की गई योजनाओं को बदनाम करने और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में लगी है।
आरडीजी पर भी घेरा, बोले- ‘रोते-रोते आए थे, रोते ही जाएंगे’
विधानसभा में नियम-130 के तहत युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान आरडीजी को लेकर सरकार की ओर से केंद्र पर लगाए गए आरोपों पर भी जयराम ठाकुर ने पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि हर समस्या के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। जयराम ने दावा किया कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान हिमाचल को दो वित्तीय वर्षों में 18 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार के दो कार्यकाल में हिमाचल को 89,300 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र को कोसने के बजाय प्रदेश सरकार को यह बताना चाहिए कि वह आगे क्या करने वाली है। आरडीजी बंद होने के मुद्दे पर जयराम ने कहा कि हिमाचल ही नहीं, 17 राज्यों की आरडीजी बंद हुई है और इनमें भाजपा शासित राज्य भी शामिल हैं।
आखिर में जयराम ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए कहा“आप रोते-रोते आए थे, रोते ही जाएंगे।”