*देवभूमि न्यूज 24*
नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का दम दिखाया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और वैश्विक व्यापार तनाव जैसी चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से कहीं बेहतर रहा।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 तिमाही में वास्तविक GDP 81.36 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 75.46 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल GDP 10.3 प्रतिशत बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।
अनुमानों को पीछे छोड़ निकली इकोनॉमी
GDP के आंकड़ों ने अर्थशास्त्रियों के अनुमानों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस तिमाही में करीब 7.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा था, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की रफ्तार दर्ज कर उम्मीदों को मात दी। यह RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक है।
इस मजबूत प्रदर्शन में घरेलू मांग, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका रही। पहली तिमाही में वास्तविक GVA वृद्धि 8.2 प्रतिशत रही। निवेश में भी मजबूत तेजी देखने को मिली, जबकि घरेलू खपत ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उथल-पुथल, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग और निवेश ने बाहरी झटकों के असर को काफी हद तक संभालने में मदद की है।
7.8 प्रतिशत की GDP ग्रोथ ने साफ संकेत दिया है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार फिलहाल मजबूती से कायम है।