कैग रिपोर्ट ने सुक्खू सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोली: जयराम ठाकुर

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भ्रष्टाचार को संरक्षण देने, विकास की राशि अन्यत्र खर्च करने और भारी कर्ज लेने के लगाए आरोप
देवभूमि न्यूज 24
शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने, प्रदेश के वित्तीय संसाधनों के कुप्रबंधन और विकास कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का अन्यत्र इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट ने सरकार की वित्तीय व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर प्रदेश की जनता के सामने रख दी है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फिस्कल डिसिप्लिन और फिस्कल प्रूडेंस जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपनी सरकार की वित्तीय उपलब्धियों का दावा करते हैं, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उनके अनुसार सरकार की गलत वित्तीय नीतियों के कारण प्रदेश का कैश बैलेंस तेजी से घटा है और वित्तीय व्यवस्था सरकार के नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2022-23 तक कैश बैलेंस इन्वेस्टमेंट अकाउंट लगातार बढ़ा और पूर्व भाजपा सरकार के दौरान यह ₹3,645.18 करोड़ तक पहुंच गया था। इसके बाद 2023-24 में इसमें ₹2,187.37 करोड़ और 2024-25 में ₹1,457.81 करोड़ की कमी आई। जयराम ठाकुर ने इसे सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का स्पष्ट प्रमाण बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की स्थिति इतनी खराब हो गई कि साल के 162 दिनों यानी 44 प्रतिशत दिनों में निर्धारित न्यूनतम नकदी तक उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि 12 महीनों में प्रदेश की ट्रेजरी 42 बार ओवरड्राफ्ट हुई। वर्ष के अंत तक ₹1,652.42 करोड़ की राशि चुकाई नहीं जा सकी और इस अल्पकालिक उधारी पर सरकार को ₹12.40 करोड़ अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार उधारी पर निर्भर होती जा रही है। उनके अनुसार 12 महीनों में 120 बार वेज एंड मीन्स एडवांस के माध्यम से आरबीआई से कुल ₹11,276.83 करोड़ लिए गए। जयराम ठाकुर ने कहा कि इतनी बार और इतनी बड़ी मात्रा में अल्पकालिक ऋण लेना प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जयराम ठाकुर ने सरकार पर विकास योजनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के धन के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए जारी राशि को सरकार चलाने के दूसरे खर्चों में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो रही हैं, उनकी लागत बढ़ रही है और उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका असर आगामी बजट आवंटन पर भी पड़ रहा है और कई योजनाओं की राशि वापस करने की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार के इस कथित वित्तीय कुप्रबंधन का सीधा असर प्रदेश के विकास और आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस सरकार का दावा है कि हिमाचल को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाया जाएगा, वह लगातार बढ़ती उधारी और कमजोर होते वित्तीय संसाधनों के बीच यह लक्ष्य कैसे हासिल करेगी।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से इस लक्ष्य को हासिल करने का ठोस वित्तीय रोडमैप प्रदेश की जनता के सामने रखने की मांग की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार बताए कि आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने का उसका फार्मूला क्या है और उसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कहीं आत्मनिर्भर और समृद्ध हिमाचल बनाने का दावा भी मुख्यमंत्री के अन्य दावों की तरह महज राजनीतिक बयान तो नहीं है।