*देवभूमि न्यूज 24*
लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी द्वारा स्थापित राष्ट्रीय-सांस्कृतिक एकात्मकता का प्रतीक सार्वजनिक गणेशोत्सव अपनी स्थापना के 134 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। दक्षिण भारत की सीमाओं को लांघकर हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत जिला मंडी शहर के ऐतिहासिक रियासतकालीन मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी जिला मंडी शहर मुख्यालय के श्री सिद्ध गणपति मंदिर में 20 अगस्त 1989 में हुई।
इस सर्व प्रथम सार्वजनिक गणपति-उत्सव में कुल्लू घाटी के श्री देव बड़ा छमाहुं ,द्रंग की भगवती व श्री माता महाकाली पुरानी मंडी के देवी-देवताओं के रथ सम्मिलित होकर विशुद्ध सनातन धर्म संस्कृति का सूत्रपात करवाया था। जिला मंडी शहर के सर्वप्रथम सार्वजनिक गणेशोत्सव को श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव का नामकरण संस्थापक राजीव शर्मन द्वारा नामांकित किया गया था। व्यास नदी तट पर गणपति पूजा विसर्जन के दौरान समूचा मंडी शहर गणपति मय होने की रंगत में रंग चुका था। कालान्तर में श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव अपनी स्थापना के 38 वीं वर्षगांठ की ओर अग्रसर हुआ है। यही नही गाणपात्य भक्तों की उतरोतर वृद्धि के चलते आज मंडी शहर में दर्जनों गणेश मंडल बड़ी श्रद्धा व उल्लास से गणपति-उत्सव आयोजित करते आ रहे है।
श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव का गौरवान्वित धार्मिक स्वरूप विकासोन्मुखी होकर एक बहुत बड़े मेले का स्वरूप धारण कर चुका है।
इसी श्री मांडव्य नगर गणेशोत्सव की तर्ज पर गणेशोत्सव के संचालक राजीव शर्मन का सरकारी सेवा में तबादला जिला ऊना-हिमाचल प्रदेश के चौकीमन्यार में हुआ तो यहां चौकीमन्यार में भी सन ईस्वी 2007 में सार्वजनिक गणेशोत्सव का सूत्रपात सफलतापूर्वक करवाया गया।
वर्तमान में जिला ऊना की अम्ब तहसील उपमंडल का सार्वजनिक गणेशोत्सव को श्री अम्बिकानगर-अम्ब गणेशोत्सव का नामकरण दिया गया है जो कि अपनी स्थापना के 29 वें वर्ष में प्रवेश कर गया है।
जिला ऊना-हिमाचल प्रदेश की सदानीरा स्वर्गिक सोमभद्रा-स्वां नदी में सार्वजनिक गणेशोत्सव पूजा विसर्जित की जाती है।
इसी तरह जिला मंडी शहर मुख्यालय की सब तहसील कोटली तुंगल इलाका के गांव पटनाल-कसाण के सिद्ध श्री हनुमान मंदिर में भी विगत कई सालों से गणपति-उत्सव का संचालन किया जा रहा है। इस गणेशोत्सव आयोजन को श्री तुंगल नगर गणेशोत्सव नामांकित किया गया है। श्री तुंगल नगर गणेशोत्सव की गणपति प्रतिमा को समीपवर्ती कोट-कुन्नतर की व्यास नदी में विसर्जित किया जाता है।
श्री तुंगल नगर गणेशोत्सव का भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। हर साल की तरह इस साल भी हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर सार्वजनिक गणेशोत्सव 14 से 25 सितम्बर तक बड़े हर्षोल्लास से आयोजित किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के सार्वजनिक गणेशोत्सव का स्वरूप विकासात्मक है तथापि इसका प्रचार-प्रसार आगे बढ़कर एक धार्मिक सांस्कृतिक चेतना व आदान-प्रदान का पर्याय बन चुका है।
हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा एवं संस्कृति विभाग को गणपति-उत्सव की साकारात्मक प्रासंगिकता को देखते हुए इसमें सारे हिमाचल प्रदेश की कला संस्कृति का महा-समागम भी करवाया जा सकता है।
सारे हिमाचल प्रदेश के साहित्यकार, लेखकों व पारम्परिक नृत्य-संगीत कलाकारों को सरकारी तौर पर प्रोत्साहन देते हुए एक स्वस्थ परम्परा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश गणपति-उत्सव के संचालक, संस्थापक व प्रचार-प्रसार मंत्री राजीव शर्मन ने गणपति-उत्सव के विकासवादी स्वरूप को सरकारी संरक्षण की जोरदार अपील की है।
राजीव शर्मन ने समस्त गणेशोत्सव आयोजन मंडलों को सफलतापूर्वक गणपति-उत्सव आयोजित करने की शुभकामनाएं प्रेषित की है।
जय जय श्री गणेश जी।।