देवभूमि की देव संस्कृति, लोक परंपराओं और आस्था का अनूठा संगम; राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने किया अंतरराष्ट्रीय दशहरा महोत्सव का शुभारंभ
कुल्लू, हिमाचल प्रदेश | देवभूमि न्यूज 24
हिमाचल प्रदेश की देवभूमि कुल्लू में अंतरराष्ट्रीय दशहरा महोत्सव का बुधवार को भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। देव-मानस के मिलन का प्रतीक यह ऐतिहासिक उत्सव ढालपुर मैदान में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक देव वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच शुरू हुआ। भगवान रघुनाथ सहित करीब 300 देवी-देवताओं के आगमन से पूरा ढालपुर क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
21 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय महोत्सव में देव परंपराओं, लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में विराजमान होने के साथ ही कुल्लू घाटी में उत्सव की रौनक बढ़ गई है।
शाम 4:22 बजे पालकी में सवार होकर रथ मैदान पहुंचे भगवान रघुनाथ
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव के मुख्य आकर्षण भगवान रघुनाथ बुधवार शाम 4:22 बजे पालकी में सवार होकर रथ मैदान पहुंचे। यहां विधिवत पूजा-अर्चना और अन्य पारंपरिक देव अनुष्ठान संपन्न किए गए।
इसके बाद शाम 5:14 बजे भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा ‘जय श्रीराम’ के जयघोष और देव वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच ढालपुर की ओर रवाना हुई। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार रथयात्रा 24 मिनट देरी से शुरू हुई।
शाम 5:25 बजे रथयात्रा भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर तक पहुंची। इस दौरान कुल्लू घाटी देव वाद्ययंत्रों की स्वर लहरियों और श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंज उठी। जगह-जगह खड़े श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ के दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट की।
🌸 भगवान रघुनाथ के साथ चले कई प्रमुख देवी-देवता
रथयात्रा में भगवान रघुनाथ के साथ बिजली महादेव, हिडिंबा माता, देवता अजय पाल, पिरडी महादेव, धूम्बल नाग, जवाणी महादेव और वीरनाथ सहित करीब 100 देवी-देवता शामिल हुए।
इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति के अनुसार भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने में भाग लिया। रथयात्रा के दौरान देवी-देवताओं की उपस्थिति और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। आयोजन में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल भी मौजूद रहे।
🚩 सात दिन तक ढालपुर में रहेगी देव संस्कृति की धूम
21 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा।
ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं के अस्थायी शिविर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यहां आने वाले लोग देव परंपराओं को करीब से देखने और कुल्लू की समृद्ध लोक संस्कृति से रूबरू होने का अवसर प्राप्त करेंगे।
प्रशासन और दशहरा उत्सव समिति की ओर से आयोजन को सुचारु बनाने के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुरू हुए इस महोत्सव ने एक बार फिर कुल्लू घाटी को आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के रंग में रंग दिया है।
👮 विवाद के चलते पुलिस पहरे में रहे श्रृंगा ऋषि और बालू नाग
अंतरराष्ट्रीय दशहरा महोत्सव के दौरान स्थानीय विवाद के चलते अधिष्ठाता देवता श्रृंगा ऋषि और बालू नाग के अस्थायी शिविरों के आसपास पुलिस पहरा रहा।
जानकारी के अनुसार, दोनों देवता सुबह अपने लाव-लश्कर के साथ भगवान रघुनाथ मंदिर पहुंचे थे। इसके बाद रथयात्रा तक दोनों देवताओं की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही।
यह घटनाक्रम भी महोत्सव के दौरान चर्चा का विषय बना रहा।
🏵️ राज्यपाल कविंद्र गुप्ता बोले
श्रीराम का जीवन सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा
प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने बुधवार को ढालपुर में अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम कुल्लू दशहरा को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है और इसे देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाता है।
उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं होतीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए सामर्थ्य एवं मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। इन परंपराओं का संरक्षण करना और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
🌺 देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है कुल्लू दशहरा
कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महोत्सव है। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा, सैकड़ों देवी-देवताओं का आगमन और पारंपरिक देव अनुष्ठान इस आयोजन को विशेष बनाते हैं।
यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को सहेजने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।
भगवान रघुनाथ की जयकारों के साथ शुरू हुआ कुल्लू दशहरा महोत्सव अगले सात दिनों तक देवभूमि की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की छटा बिखेरेगा।
जय श्रीराम! जय देवभूमि हिमाचल!
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