केंद्र से मिली हजारों करोड़ की पुनर्निर्माण राशि के बावजूद सड़कें बदहाल, टेंडर से लेकर भुगतान तक की जांच और विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग
देवभूमि न्यूज 24
पांवटा साहिब : भाजपा हिमाचल प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता एवं शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव सिंह तोमर ने आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए जारी पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) फंड के इस्तेमाल को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आपदा पुनर्निर्माण के नाम पर कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच करवाने और जनता के पैसे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।
बलदेव सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर भूस्खलन नहीं होने के बावजूद कागजों में स्लिप दर्शाकर टेंडर तैयार करने तथा पर्याप्त काम किए बिना बिलों का भुगतान करने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह आपदा प्रभावित लोगों के हितों और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए प्रत्येक कार्य का निष्पक्ष सत्यापन आवश्यक है।
केंद्र ने स्वीकृत की ₹2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना
तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार ने 18 जून 2025 को वर्ष 2023 की आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए ₹2,006.40 करोड़ की योजना स्वीकृत की थी। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ₹1,504.80 करोड़ निर्धारित किया गया था। उन्होंने बताया कि पहली केंद्रीय किस्त के रूप में ₹451.44 करोड़ जारी किए गए।
उन्होंने 13 जनवरी 2026 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी किस्त के तहत विभिन्न विभागों के लिए ₹753.29 करोड़ स्वीकृत किए गए, जिसमें ₹564.97 करोड़ केंद्रीय और ₹188.32 करोड़ राज्य का हिस्सा दर्शाया गया है। उनके अनुसार, इस राशि में लोक निर्माण विभाग को ₹487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को ₹176.48 करोड़, कृषि विभाग को ₹29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को ₹18.22 करोड़ स्वीकृत किए गए।
करोड़ों की राशि के बावजूद सड़कें बदहाल क्यों?
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत की गई, तो प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में सड़कें अब भी बदहाल क्यों हैं? उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गड्ढों, क्षतिग्रस्त सड़कों और बाधित यातायात के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तोमर ने अगस्त 2026 में 259 सड़कों के अवरुद्ध होने की खबरों और सितंबर में ठियोग तथा किन्नौर के पूह क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर यातायात बाधित होने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया कि पुनर्निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि का जमीनी स्तर पर कितना लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि स्वीकृत राशि में से कितनी धनराशि खर्च की गई, कितने कार्य पूरे हुए और कितने कार्य अभी अधूरे हैं।
नियमों के तहत खर्च और सत्यापन की जानकारी सार्वजनिक करे सरकार
बलदेव सिंह तोमर ने कहा कि सरकारी आदेशों के अनुसार PDNA फंड का इस्तेमाल वर्ष 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त और स्वीकृत परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नियमों के दायरे से बाहर किए गए खर्च के लिए संबंधित स्वीकृति अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रत्येक टेंडर जारी करने से पहले वास्तविक नुकसान का भौतिक सत्यापन किया गया था? क्या संबंधित स्थलों पर हुए नुकसान का आकलन सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया गया और क्या भुगतान से पहले कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की जांच की गई?
तोमर ने कहा कि आदेश में मार्च 2026 तक धनराशि का उपयोग करने और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता के सामने यह जानकारी रखनी चाहिए कि निर्धारित समयसीमा तक कितनी राशि खर्च हुई, कितने बिल पास किए गए और कितने कार्यों का निरीक्षण या ऑडिट करवाया गया।
68 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने संबंधी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में PDNA फंड के तहत स्वीकृत राशि, जारी टेंडर, संबंधित ठेकेदारों और किए गए भुगतानों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा, “आपदा पीड़ितों के पुनर्निर्माण के लिए आवंटित धनराशि किसी के राजनीतिक संरक्षण या निजी लाभ का साधन नहीं बन सकती। जहां भी अनियमितता के प्रमाण मिलें, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।”
बलदेव सिंह तोमर ने संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट करवाने, सभी निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करने और PDNA फंड के इस्तेमाल पर विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने पारदर्शी तरीके से पूरा हिसाब रखना चाहिए, ताकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
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