देवभूमि न्यूज 24 | धर्म-संस्कृति
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य देने तथा खीर का भोग लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
इस अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। श्रद्धालु घरों में दीपक जलाते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
शरद पूर्णिमा की पूजा विधि
- स्नान और स्वच्छता: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की सफाई करें।
- पूजा की तैयारी: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक प्रज्वलित करें: भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
- संकल्प लेकर पूजा करें: हाथ में जल और पुष्प लेकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए संकल्प लें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- मंत्र और स्तुति: मां लक्ष्मी की चालीसा, भगवान विष्णु के मंत्र और धार्मिक स्तुतियों का पाठ करें।
- खीर का भोग लगाएं: दूध, चावल और चीनी से बनी खीर तैयार करके भगवान को अर्पित करें। कई परिवारों में खीर को रात में चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है।
- चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करके जल अर्पित करें और मन की शांति तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
- आरती और प्रसाद वितरण: पूजा के अंत में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें। इसके बाद प्रसाद वितरित करें और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करने और अर्घ्य देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा को मन और शीतलता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु चंद्रमा के दर्शन करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
चंद्रमा की पूजा के दौरान श्रद्धालु इस मंत्र का जाप कर सकते हैं—
ॐ सों सोमाय नमः।
मां लक्ष्मी की आरती
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की आरती करने की परंपरा है। श्रद्धालु पूजा के दौरान प्रचलित ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ आरती का पाठ कर सकते हैं। इसके माध्यम से मां लक्ष्मी से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
शरद पूर्णिमा 2026: तिथि और पूजा का समय
पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा की तिथि और पूजा का समय स्थानीय पंचांग तथा धार्मिक परंपराओं के अनुसार देखा जाना चाहिए। इस वर्ष 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा मनाए जाने की जानकारी दी जा रही है। हालांकि, प्रकाशन से पहले पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ और समाप्ति के समय तथा चंद्रोदय के समय की विश्वसनीय पंचांग से पुष्टि करना आवश्यक है।
श्रद्धा और आस्था का पर्व है शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा भारतीय धार्मिक परंपरा में आस्था, भक्ति और उल्लास का पर्व है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। घरों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, खीर का भोग लगाया जाता है और चंद्रमा की आराधना की जाती है। यह पर्व परिवार के सदस्यों के साथ धार्मिक परंपराओं को निभाने और सेवा-दान के महत्व को याद करने का अवसर भी प्रदान करता है।
देवभूमि न्यूज 24 की ओर से सभी पाठकों को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।
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