श्री तुंगल नगर घाटी का घरेलू सन्त

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देवभूमि न्यूज 24

ऊना। सबसे पहले डागू राम सन्त से भेंट भरगांव के सुरगणीं माता जी के मेलों में हुई। भगवा वेश में 108 रुद्राक्ष माला धारण किए उनकी दिव्य उपस्थिति दशकों तक तुंगल घाटी को आह्लादित करती रही। कबीर की तरह निरक्षर होते हुए भी उनके प्रवचन मन पर अमिट छाप छोड़ते थे।

दामोदर की दुकान पर शीशे के गिलास में चाय देने पर सन्त ने इनकार किया तो पीईटी मास्टर जिंदू राम जी ने कहा – सन्त को पीतल के गिलास में चाय दो। ज्योतिष ज्ञाता जिंदू राम सफेद हैट में नौसेना कप्तान जैसे लगते थे।

मेले के अंतिम दिन दामोदर के घर के बाहर 3 मीटर लंबा काला कोबरा निकल आया। महिलाओं ने धूप-गुग्गल जलाकर प्रार्थना की। हाड़ूराम किसान ने बंदूक से उसे मार गिराया और ग्रामीणों ने अरनोड्डी खड्ड के पास दफना दिया।

इस घटना के बाद डागू राम सन्त और जिंदू राम जी की प्रेरणा से दामोदर दास ने शिव मंदिर, नवग्रह और नाग मंदिर के लिए 2 बीघा जमीन दान दी। अब वहां भव्य मंदिर और धर्मशाला है, जहां गरीबों को निःशुल्क भोजन मिलता है। अब ग्रामीण नई गौशाला, दोनों सन्तों की आदमकद प्रतिमा, घुराण स्कूल को सांस्कृतिक स्मारक और कामरेड धनीराम व पंडित सुखराम की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं।

– लेखक:राजीव कुमार शर्मन् सोमभद्रा, अम्ब

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