सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की करेंगी कामना, चंद्रोदय के बाद खोलेंगी व्रत
*देवभूमि न्यूज 24*
हिंदू धर्म में करवा चौथ का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस वर्ष करवा चौथ का त्योहार आज, 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और रात को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने की परंपरा का विशेष महत्व है। महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण कर व्रत आरंभ करती हैं और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा करती हैं। इस अवसर पर करवा चौथ की कथा सुनने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
दिल्ली में रात 8:17 बजे के आसपास चंद्रोदय की संभावना
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 29 अक्टूबर को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:17 बजे बताया गया है। हालांकि, चंद्रमा निकलने का वास्तविक समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय चंद्रोदय समय-सारणी के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करना चाहिए। चंद्रमा के दर्शन होने के बाद ही अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है।
छलनी से चंद्रमा और पति के दर्शन की परंपरा
करवा चौथ की पूजा में छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा प्रचलित है। चंद्रोदय होने पर महिलाएं पूजा की थाली लेकर चंद्रमा के दर्शन करती हैं। इसके बाद जल, अक्षत और पुष्प अर्पित कर अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है।
यह परंपरा पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना का प्रतीक मानी जाती है। पूजा करते समय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
अर्घ्य देते समय इन बातों का रखें ध्यान
करवा चौथ की पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा की थाली में जल से भरा पात्र, अक्षत, पुष्प, दीपक और अन्य आवश्यक पूजन सामग्री रखी जा सकती है।
चंद्रमा के दर्शन होने के बाद परंपरा के अनुसार अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद परिवार की मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कर व्रत खोलें। पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती है।
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। अस्वस्थता या कमजोरी महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
प्रेम, आस्था और सौभाग्य का पर्व है करवा चौथ
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में दांपत्य प्रेम, पारिवारिक एकता और पारस्परिक विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती से अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला यह पर्व परिवारों को आपसी प्रेम और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है।
ऊँ श्री पार्वतीपतये नमः।
सभी सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।
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