प्रदेश सरकार से विकास कार्यों के लिए अभी एक रुपया नहीं मिला, बीडीओ को कहां से दें 2 हजार रुपये? स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देने की उठाई मांग
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के उद्योगों को चंदे के नाम पर परेशान न किया जाए : पंचायत प्रधान
देवभूमि न्यूज 24 | कार्तिकेय तोमर, नाहन
नाहन। अंतरराष्ट्रीय श्रीरेणुकाजी मेले के आयोजन के लिए जिला प्रशासन की ओर से पंचायत प्रधानों से 2-2 हजार रुपये की आर्थिक मदद मांगे जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। कालाअंब पंचायत के प्रधान यशपाल शर्मा ने प्रशासन के इस कदम का विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि जब प्रदेश सरकार की ओर से पंचायत को विकास कार्यों के लिए अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला है, तो पंचायत प्रधान बीडीओ कार्यालय को 2 हजार रुपये कहां से दें?
इस मुद्दे को लेकर यशपाल शर्मा ने नाहन में पत्रकार वार्ता कर जिला प्रशासन और विकास खंड अधिकारी नाहन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीडीओ कार्यालय नाहन की ओर से सभी पंचायत प्रधानों से अंतरराष्ट्रीय श्रीरेणुकाजी मेले के आयोजन के लिए 2 हजार रुपये देने की मांग की गई है, जो उचित नहीं है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड की है और बोर्ड को अपने संसाधनों से ही इसके लिए वित्तीय व्यवस्था करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेले में दुकानों के प्लॉट महंगे दामों पर आवंटित किए जाते हैं। ऐसे में इनसे प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग मेले के आयोजन में किया जाना चाहिए। इसके अलावा मेले में महंगे बॉलीवुड और बाहरी कलाकारों को बुलाने के बजाय स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और आयोजन पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
यशपाल शर्मा ने औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी पंचायत में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित हैं। उद्योगों को चंदे के नाम पर बार-बार परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पड़ोसी हरियाणा में भी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि यहां के उद्योगों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बनाया गया तो उद्योग दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर सकते हैं, जिसका नुकसान प्रदेश को उठाना पड़ेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मेले के आयोजन के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है तो विधायक और सरकारी अधिकारी अपने वेतन से आर्थिक सहयोग करें। पंचायत प्रतिनिधियों पर आर्थिक मदद के नाम पर दबाव बनाना उचित नहीं है।
यशपाल शर्मा ने कहा कि यदि जिला प्रशासन का कोई अधिकारी इस मुद्दे या किसी अन्य कार्य को लेकर उनके साथ भेदभाव करता है अथवा उन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास करता है, तो वह संबंधित अधिकारी के कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
वहीं, इस मामले में जब उपायुक्त सिरमौर एवं श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड की उपाध्यक्ष प्रियंका वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी।
इधर, पंचायत प्रधान यशपाल शर्मा के इस विरोध के बाद सिरमौर जिला में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर उठाई गई मांग के विरोध में खुलकर सामने आने पर कई लोग उनके रुख की सराहना कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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